श्रीमान जिलाधीश महोदय,
रतलाम (म.प्र.) 457001
31/07/2021
विषय :- बाल चिकित्सालय में चल रहे निर्माण कार्य के संदर्भ में |
श्रीमान,
निवेदन है कि वर्तमान में बाल चिकित्सालय में निर्माण कार्य चल रहा है एवं चिकित्सालय के बाहरी परिसर से संबंधित कार्य प्रगति पर है उसी संदर्भ में निम्नलिखित सुझाव आपके समक्ष ध्यानाकर्षण हेतु रखना चाहता हूँ
1- बाल चिकित्सालय के पास से GPO रोड़ से शास्त्री नगर कॉलोनी को जाने वाला मार्ग जो की अत्यंत संकरा हो गया है उसके चौड़ीकरण हेतु बाल चिकित्सालय की वर्तमान बाउंड्री वॉल को ही रोड़ डिवाइडर का स्वरुप देते हुए, कम से कम तोड़फोड़ करते हुए, वर्तमान मार्ग की चौड़ाई के बराबर की चौड़ाई परिसर के अंदर की ओर बढ़ाई जाना चाहिए |
2- इसी स्थान पर लगे पीपल के दो व एक अन्य वृक्ष को भी बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाये रोड डिवाइडर मानकर ऐसे ही रखा जा सकता है|
3- परिसर के अंदर बने रेड क्रॉस मेडिकल की दुकान व प्याऊ को भी MCH परिसर के अंदर बने नए उपहार गृह के पास स्थानांतरित किया जा सकता है |
4- ऐसा करने से बाल चिकित्सालय के मुख्य भवन की दीवार को ही शास्त्री नगर मार्ग वाली साइड पर बनी बॉउंड्री मान कर, GPO रोड़ की ओर आगे विस्तारित किया जा सकता है|
5- MCH का मुख्य द्वार ही बाल चिकित्सालय का मुख्य द्वार समझा जाना चाहिए। क्योंकि वहाँ पहले से ही व्यवस्थित पार्किंग और उपहार गृह, अधिक खुला परिसर व अन्य सुविधाएँ उपलब्ध हैं |
6- कुछ वर्षों पूर्व तक बाल चिकित्सालय एकमात्र था, लेकिन वर्तमान में इससे लगा MCH बन जाने से अब इन दोनों परिसरों को मिलाकर एक ही मानते हुए इनका एकमात्र प्रवेश मार्ग अर्थात MCH मेन गेट ही होना चाहिए| हाँ, साथ ही अत्यंत आवश्यक होने पर शास्त्री नगर वाले हिस्से में पैदल आने जाने हेतु छोटा गेट रखा जा सकता है|
7- ऐसा करने से शास्त्री नगर को जोड़ने वाले मार्ग को Two lane जैसा स्वरुप दिया जा सकेगा |
8- बाल चिकित्सालय के GPO रोड़ साइड बने वर्तमान बाहरी प्रवेश द्वार के स्थान पर एक छोटा प्रवेश द्वार, left की ओर shift किया जाकर इसकी शास्त्री नगर तिराहे से दूरी बढ़ाई जाने से कॉर्नर पर अक्सर होने वाली दुर्घटनाओं से नागरिकों को बचाया जा सकता है|
9- जिस प्रकार से SBI तिराहे पर फोरलेन की चौड़ाई बढ़ाने हेतु SBI ने सहयोग कर, शहर हित में एक उत्कृष्ठ, प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है उसी तरह संपूर्ण रतलाम शहर में, शहर को वास्तविकता में स्मार्ट बनाने वाले सुझावों पर ध्यान देना होगा |
10- शासन के द्वारा जनहित में किये जाने वाले इस निर्माण कार्य में व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए इन बिंदुओं पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए, यही अपेक्षा|
धन्यवाद
अनिल पेंडसे 9425103895
रतलाम
प्रतिलिपि
सभी संबंधित व्यक्ति, संस्थाऐं व समाचार पत्र|
Saturday, July 31, 2021
बाल चिकित्सालय में चल रहे निर्माण कार्य के संदर्भ में सुझाव
Labels:
यातायात के संबंध में सुझाव
Location:
Ratlam, Madhya Pradesh 457001, India
Wednesday, July 21, 2021
कबाड़ा नगर ( ट्रांसपोर्ट नगर जैसा ) बनाया जाकर
श्रीमान जिलाधीश महोदय,
रतलाम म. प्र.
21/07/21
निवेदन है कि संपूर्ण शहर भर में सड़क पर कबाड़ रखने की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए एक कबाड़ा नगर ( ट्रांसपोर्ट नगर जैसा ) बनाया जाकर, सभी संबंधित व्यापारियों को तत्काल, अनिवार्य रूप से स्थानांतरित कर देना चाहिए| इसके लिए भविष्य को देखते हुए शहर के बाहर की भूमि को चिन्हित कर संपूर्ण शहर को एक ही बार में कबाड़ मुक्त किया जा सकता है| जिससे नागरिकों के साथ साथ प्रशासनिक अमले को भी पुनः पुनः सिर उठाने वाली इस समस्या से आजीवन मुक्ति मिल सकेगी|
चूँकि कबाड़ को रखने के लिए कोई विशेष व्यवस्था की या किसी भी प्रकार के बड़े निर्माण की आवश्यकता नहीं होने से खुली जमीन आवंटित कर नगर निगम को तत्काल राजस्व की प्राप्ति के साथ, शहर की सुंदरता को स्थायी समाधान दिया जा सकेगा|
अनिल पेंडसे 9425103895
रतलाम
Labels:
यातायात के संबंध में सुझाव
Location:
Ratlam, Madhya Pradesh 457001, India
Thursday, August 29, 2019
फिट इंडिया अभियान:फोरलेन पर सायकल ट्रैक आवश्यक
फिट इंडिया अभियान का शुभारंभ कर आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने स्वास्थ्य से जुडे कई तथ्यों पर देश का ध्यानाकर्षण किया है। जिसमें जीवन शैली में बहुत साधारण परिवर्तन कर हम अपने आप को स्वस्थ बना सकते हैं इसी संदर्भ में अपने रतलाम को लेकर एक विचार आप सभी मित्रों के सामने रखना चाहता हूंं कि हमारे शहर के विद्यार्थी केवल अपने रहवासी क्षेत्र में कभी कभी सायकल चलाते दिख जाते हैं। लेकिन उन्हें सायकल से स्कूल कॉलेज जाते नहीं देख पाते हैं। रतलाम एक छोटा शहर है जिसमें विकास की बहुत सारी संभावनाएं अपेक्षित हैं। केवल पांच किलोमीटर की परिधी में बसे इस छोटे से शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक जाने हेतु आसानी से सायकल का उपयोग किया जा सकता है। लेकिन हमारे शहर की सड़कों पर सायकल ट्रैक का न होना हमारी संकीर्ण सोच प्रदर्शित करता है। इसी कारण हम सायकल चलाने को लेकर बच्चों को प्रोत्साहित नहीं कर पा रहे हैं। सैलाना बस स्टेंड से लेकर कान्वेंट स्कूल तिराहे तक बनने वाले फोरलेन पर आवश्यक रूप से सायकल ट्रैक होना चाहिये । आसपास की जमीनों को अधिग्रहित भी करना पडा तो भी यह राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिये आवश्यक है।
लगभग प्रतिदिन स्कूली वाहनों में ठूंस कर भरे गये बच्चों के समाचार पत्रों में प्रकाशित फोटो या साक्षात दर्शन भी हमें सामान्य लगने लगे हैं। क्या सभी पालकों की इसके लिये अपने शहर के नेतृत्व से अपेक्षा रखना गलत है? लगभग हम सभी सायकल को प्राथमिकता देना चाहते हैं लेकिन अव्यवस्थित व अनियंत्रित यातायात हमारी सोच में बहुत बडी बाधा बन जाता है। इसलिये हम सायकल चलाने को प्रोत्साहित नहीं कर पा रहे हैं, हम सायकल चलाने से बच रहे हैं। सायकल ट्रैक का प्रावधान न होना इसका मूल कारण है। आप सभी इस पर विचार करें, पालक संघ या अन्य सामाजिक संस्थाएं संगठित होकर, शासन को अपने सुझाव अवश्य भेजें। विभिन्न स्कूलों में आने वाले बच्चों में कितने बच्चों को सायकल चलाना नहीं आती इन आंकडों पर भी अवश्य ध्यान दें।
इसके अतिरिक्त सायकल चलाने को लेकर जनमानस में व्याप्त हीन भावना को भी दूर करना होगा तथा सायकल चलाना यह सामाजिक प्रतिष्ठा का विषय न होकर इसे स्वास्थ्य से जोड़ कर देखना चाहिये।
अनिल पेंडसे 9425103895
#FitIndiaMovement
लगभग प्रतिदिन स्कूली वाहनों में ठूंस कर भरे गये बच्चों के समाचार पत्रों में प्रकाशित फोटो या साक्षात दर्शन भी हमें सामान्य लगने लगे हैं। क्या सभी पालकों की इसके लिये अपने शहर के नेतृत्व से अपेक्षा रखना गलत है? लगभग हम सभी सायकल को प्राथमिकता देना चाहते हैं लेकिन अव्यवस्थित व अनियंत्रित यातायात हमारी सोच में बहुत बडी बाधा बन जाता है। इसलिये हम सायकल चलाने को प्रोत्साहित नहीं कर पा रहे हैं, हम सायकल चलाने से बच रहे हैं। सायकल ट्रैक का प्रावधान न होना इसका मूल कारण है। आप सभी इस पर विचार करें, पालक संघ या अन्य सामाजिक संस्थाएं संगठित होकर, शासन को अपने सुझाव अवश्य भेजें। विभिन्न स्कूलों में आने वाले बच्चों में कितने बच्चों को सायकल चलाना नहीं आती इन आंकडों पर भी अवश्य ध्यान दें।
इसके अतिरिक्त सायकल चलाने को लेकर जनमानस में व्याप्त हीन भावना को भी दूर करना होगा तथा सायकल चलाना यह सामाजिक प्रतिष्ठा का विषय न होकर इसे स्वास्थ्य से जोड़ कर देखना चाहिये।
अनिल पेंडसे 9425103895
#FitIndiaMovement
Friday, February 8, 2019
SBI ने अपनी नाकामी को पिछले दरवाजे से किया स्वीकार
SBI ने अपनी नाकामी को पिछले दरवाजे से किया स्वीकार —
देश की सबसे बडी कही जाने वाली बैंक एसबीआय की हास्यास्पद पहल 'नईदिशा' के अंतर्गत कर्मचारियों पर बढते वर्कलोड़ की अनदेखी के चलते बैंक अपने कर्मचारियों को सप्ताह में एक दिन समय पर घर जाने की छूट दे रहा है अर्थात इसमें प्रबंधन ने स्वीकार किया है कि बाकि के 5 दिन छूट नहीं है। बैंक प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों का ध्यान रखने में पूर्ण रूप से अक्षम साबित होकर, अपनी नाकामी को छिपाने के लिये,उल्टा उसे ओर महिमामंडित करने के लिये 'नईदिशा' नाम से प्रोग्राम शुरू किया है जिसमें पत्नियां बॉस से शिकायत कर सकेंगी की उनका पति समय पर घर नहीं पहुंच रहा। अपने ही कर्मचारियों को मूर्ख बनाने की इस पहल को प्रबंधन की सकारात्मकता बताकर कर्मचारियों के साथ साथ ग्राहकों को भी धोखे में रखा जा रहा है। किसी भी शाखा के कर्मचारी अपने इसी वर्कलोड़ के चलते पत्नी के अलावा ग्राहकों पर भी अपनी झल्लाहट उतारते नज़र आ रहें हैं। कर्मचारी पती व उसकी पत्नि में नोंक झोंक कम करने के लिये पहले उसे कर्मचारी व ग्राहकों की होने वाली नोंक झोंक के कारणों पर ध्यान देना चाहिये। जिससे वास्ताविकता में 'नईदिशा' की ओर बढा जा सके।
उल्लेखनीय है कि ऑनलाईन बैंकिंग को प्रोत्साहित करने के एवज में पहले ही बैंकों में कर्मचारियों की कमी बनाकर रखी हुई है। उस पर बैंकों व शाखाओं का भी मर्जिंग किया जा रहा है। नई भर्तियां भी उंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रही है। खर्चा कम करने के चक्कर में उटपटांग नीति नियम ग्राहकों पर थोपे जा रहें है। ऐसे टेक्नालॉजिकल—चेंजेस होने वाले महत्वपूर्ण समय में कर्मचारियों की संख्या कम नहीं करते हुए पहले ग्राहक हित की ओर भी ध्यान देना चाहिये।
हर बैंक की शाखा के बाहर फिक्स डिपाजिट के रेट डिस्पले जैसे एक ओर डिस्पले होना चाहिये, जिस पर आज उपस्थित कर्मचारी व आज तक के खातों की कुल संख्या का प्रतिदिन सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाना चाहिये। जिससे प्रत्येक ग्राहक को बैंक परिसर में अंदर आने से पहले ही पता चले कि इस शाखा विशेष में कितने सेविंग,करंट,लोन व अन्य प्रकार के खातों के ग्राहक हैं एवं कर्मचारी कितने दबाव में है। जिससे वह अपना खाता कम लोड़ वाली शाखा में ले जा सके। प्रत्येक कर्मचारी लगभग कितने खातों के कार्य को देख रहा है इसका अनुपात भी इसी डिस्पले पर प्रदर्शित किया जाकर ग्राहकों से सार्वजनिक रूप से साझा किया जाना चाहिये।
ऐसा करने से प्रबंधन अपने मूर्खतापूर्ण कार्यक्रमों को लागू कर उपहास का पात्र भी नहीं बनेगा व SBI वास्ताविकता में 'नईदिशा' का उदेश्य प्राप्त कर सकेगी।
देश की सबसे बडी कही जाने वाली बैंक एसबीआय की हास्यास्पद पहल 'नईदिशा' के अंतर्गत कर्मचारियों पर बढते वर्कलोड़ की अनदेखी के चलते बैंक अपने कर्मचारियों को सप्ताह में एक दिन समय पर घर जाने की छूट दे रहा है अर्थात इसमें प्रबंधन ने स्वीकार किया है कि बाकि के 5 दिन छूट नहीं है। बैंक प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों का ध्यान रखने में पूर्ण रूप से अक्षम साबित होकर, अपनी नाकामी को छिपाने के लिये,उल्टा उसे ओर महिमामंडित करने के लिये 'नईदिशा' नाम से प्रोग्राम शुरू किया है जिसमें पत्नियां बॉस से शिकायत कर सकेंगी की उनका पति समय पर घर नहीं पहुंच रहा। अपने ही कर्मचारियों को मूर्ख बनाने की इस पहल को प्रबंधन की सकारात्मकता बताकर कर्मचारियों के साथ साथ ग्राहकों को भी धोखे में रखा जा रहा है। किसी भी शाखा के कर्मचारी अपने इसी वर्कलोड़ के चलते पत्नी के अलावा ग्राहकों पर भी अपनी झल्लाहट उतारते नज़र आ रहें हैं। कर्मचारी पती व उसकी पत्नि में नोंक झोंक कम करने के लिये पहले उसे कर्मचारी व ग्राहकों की होने वाली नोंक झोंक के कारणों पर ध्यान देना चाहिये। जिससे वास्ताविकता में 'नईदिशा' की ओर बढा जा सके।
उल्लेखनीय है कि ऑनलाईन बैंकिंग को प्रोत्साहित करने के एवज में पहले ही बैंकों में कर्मचारियों की कमी बनाकर रखी हुई है। उस पर बैंकों व शाखाओं का भी मर्जिंग किया जा रहा है। नई भर्तियां भी उंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रही है। खर्चा कम करने के चक्कर में उटपटांग नीति नियम ग्राहकों पर थोपे जा रहें है। ऐसे टेक्नालॉजिकल—चेंजेस होने वाले महत्वपूर्ण समय में कर्मचारियों की संख्या कम नहीं करते हुए पहले ग्राहक हित की ओर भी ध्यान देना चाहिये।
हर बैंक की शाखा के बाहर फिक्स डिपाजिट के रेट डिस्पले जैसे एक ओर डिस्पले होना चाहिये, जिस पर आज उपस्थित कर्मचारी व आज तक के खातों की कुल संख्या का प्रतिदिन सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाना चाहिये। जिससे प्रत्येक ग्राहक को बैंक परिसर में अंदर आने से पहले ही पता चले कि इस शाखा विशेष में कितने सेविंग,करंट,लोन व अन्य प्रकार के खातों के ग्राहक हैं एवं कर्मचारी कितने दबाव में है। जिससे वह अपना खाता कम लोड़ वाली शाखा में ले जा सके। प्रत्येक कर्मचारी लगभग कितने खातों के कार्य को देख रहा है इसका अनुपात भी इसी डिस्पले पर प्रदर्शित किया जाकर ग्राहकों से सार्वजनिक रूप से साझा किया जाना चाहिये।
ऐसा करने से प्रबंधन अपने मूर्खतापूर्ण कार्यक्रमों को लागू कर उपहास का पात्र भी नहीं बनेगा व SBI वास्ताविकता में 'नईदिशा' का उदेश्य प्राप्त कर सकेगी।
Thursday, January 17, 2019
रतलाम — काटजू नगर के नागरिकों के लिये विशेष हेलिकॉप्टर सेवा प्रारंभ की जाये।
काटजू नगर के नागरिकों को शहर से जोडने वाले मुख्य मार्ग अर्थात महर्षि वेद व्यास कॉलोनी के मेन रोड़ को तत्काल प्रभाव से सर्पिल आकृति पगडंडी घोषित किया जाना चाहिये। हाट की चौकी वाले छोर से शुरू होकर काटजू नगर के मुख्य मार्ग को जोडने वाले महर्षि वेद व्यास कॉलोनी की मुख्य गली को पगडंडी घोषित किये जाने से प्रशासन, यातायात संबंधी अपने समस्त उत्तरदायित्वों से आसानी से मुक्ति प्राप्त करते हुए भरपूर कुंभकर्णी नींद ले सकेगा। साथ ही *सभी प्रकार के अतिक्रमणकारियों को भयमुक्त करते हुए उनका सार्वजनिक सम्मान व विशेष प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किये जाने चाहिये*। जिससे इस तथाकथित मेन रोड़ पर जो भी थोडी बहुत शेष जगह बाकी है उसे भी खत्म करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सके।
साथ ही काटजू नगर के नागरिकों को बाजार क्षेत्र में आने जाने के लिये विशेष हेलिकॉप्टर सेवा की भी शुरूआत की जाना चाहिये। जिससे सीधे ही आज़ाद चौक के मध्य में उतारा जा सके। ऐसा करने से रतलाम नगर निगम का नाम विश्व की सर्वश्रेष्ठ नगर निगम के रूप में स्थापित होकर, आय प्राप्ती का नया साधन भी उपलब्ध हो सकेगा। इसी के साथ साथ काटजू नगर से सैलाना बस स्टेंड, दो बत्ती की ओर जाने के लिये भी इसी प्रकार की व्यवस्था की ओर कदम बढाये जा सकेंगे।
*निगम की व्यवस्थाओं से अतिउत्साहित एक नागरिक*
अनिल पेंडसे 9425103895
साथ ही काटजू नगर के नागरिकों को बाजार क्षेत्र में आने जाने के लिये विशेष हेलिकॉप्टर सेवा की भी शुरूआत की जाना चाहिये। जिससे सीधे ही आज़ाद चौक के मध्य में उतारा जा सके। ऐसा करने से रतलाम नगर निगम का नाम विश्व की सर्वश्रेष्ठ नगर निगम के रूप में स्थापित होकर, आय प्राप्ती का नया साधन भी उपलब्ध हो सकेगा। इसी के साथ साथ काटजू नगर से सैलाना बस स्टेंड, दो बत्ती की ओर जाने के लिये भी इसी प्रकार की व्यवस्था की ओर कदम बढाये जा सकेंगे।
*निगम की व्यवस्थाओं से अतिउत्साहित एक नागरिक*
अनिल पेंडसे 9425103895
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मेरी बात,
यातायात के संबंध में सुझाव
Monday, December 10, 2018
सैलाना रोड़ के चेतक ब्रिज पर डिवायडर लगाना प्रशंसनीय प्रयास
रतलाम शहर की यातायात व्यवस्था में लगातार सुधार कार्य देखने को मिल रहा है। इसी संदर्भ में सैलाना बस स्टेंड चौराहे से चेतक ब्रिज के दूसरे छोर तक डिवायडर लगाये गये हैं इससे यातायात एकदम व्यवस्थित हो गया है। राम मंदिर वाले छोर से सैलाना बस स्टेंड वाले छोर की ओर आने वाले वाहनों की गति उतरते समय स्वाभाविक रूप से अधिक रहती है ऐसे में काटजू नगर से बाहर जाने वाले नागरिकों को अखण्ड ज्ञान आश्रम वाली साईड से निकलना चाहिये व काटजू नगर में प्रवेश के इच्छुक नागरिकों को सज्जन किराना वाली साईड़ से आना होगा। यह यातायात के नियमों के अनुकूल भी है।
उल्लेखनीय है कि इस प्रकार के लोहे के डिवायडर केवल प्रयोगात्मक आधार हेतु ही उपयोग में लिये जाते हैं जिससे कुछ दिनों तक नागरिकों को होने वाली सुविधा/असुविधा को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सके। इस प्रयोग के सकारात्मक परिणामों के पश्चात इसे स्थायी डिवायडर में भी परिवर्तित किया जा सकेगा। जिससे ओव्हरब्रिज पर होने वाली यातायात दुर्घटनाओं पर निश्चित ही अंकुश लगाया जा सकेगा। इसी संदर्भ में काटजू नगर के नागरिकों को सैलाना बस स्टेंड से सीधे जोडने के लिये पूर्व में दिये गये सुझावों पर भी ध्यान देना होगा।
Sunday, September 2, 2018
रतलाम — नई यातायात व्यवस्था के विरोध में व्यापारियों व स्कूल प्रबंधन के कमजोर तर्क(02/09/2018)
रतलाम — नई यातायात व्यवस्था के विरोध में व्यापारियों व स्कूल प्रबंधन के कमजोर तर्क(02/09/2018)
रतलाम शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु विभिन्न प्रकार के प्रयास चल रहे हैं इन्हीं नये प्रयासों में सैलाना बस स्टेंड से लोकेन्द्र सिनेमा व शहर सराय से गायत्री सिनेमा रोड़ को वन वे बनाने का विरोध आज के समाचार पत्रों में दिखाई दे रहा है। इसमें बताया गया है कि व्यापार सिर्फ 10 प्रतिशत ही रह गया है। वन वे होने से व्यापार इतना कम हो जाना गले नहीं उतरता। व्यवसाय करने के साथ—साथ, शहर की नई यातायात व्यवस्थाओं में सहयोग देना भी व्यापारिओं/नागरिकों का कर्तव्य है। हमेशा देखने में आता है कि अव्यवस्थाओं का दोष पूर्णत: प्रशासन को दिया जाता है। अब जब प्रशासन यातायात व्यवस्था सुधारने के लिये कुछ नई व्यवस्थाएं लागू कर रहा है तो इस प्रकार का अतार्किक विरोध रतलाम को पुन: वहीं ले जायेगा जहां हम सालों पहले थे।
इसी प्रकार से यातायात व्यवस्था में सहयोग के स्थान पर स्कूलों के द्वारा हाथ झटक कला का प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। अगर आपके परिसर में हजारों बच्चे आ रहे हैं तो उनकी व्यवस्था स्कूल परिसर के अंदर व बाहर करना भी स्कूल प्रबंधन का ही दायित्व है। इस प्रकार का लचर तर्क नहीं चल सकता कि ''आॅटो बच्चों के परिजन निजी रूप से करके भेजते हैं इसमें स्कूल वालों का कोई लेना देना नहीं है''
ऐसे तो मैरिज गार्डन वाले, शॉपिंग मॉल वाले, अन्य व्यापारी सभी अपने हाथ झटक लेंगे कि ''ग्राहक तो निजी वाहन से आये हैं। हम क्या करें?'' ऐसा असहयोगात्मक व्यवहार स्वीकार्य नहीं होना चाहिये। विशेषकर शहर के आंतरिक हिस्सों में चल रहे स्कूलों को आने वाले वाहनों जैसे आॅटो को तो परिसर के अंदर स्थान देना ही होगा। प्रशासन को पूर्ण सख्ती से इस प्रकार के रवैय्ये से निपटना चाहिये।
गुजराती समाज स्कूल के प्रबंधन की प्रशंसा की जानी चाहिये कि उन्होंने संबंधित वाहनों को अपने परिसर में व्यस्थित पार्किंग देकर बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए एक आदर्श प्रस्तुत किया है।
अनिल पेंडसे,रतलाम 9425103895
Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
रतलाम शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु विभिन्न प्रकार के प्रयास चल रहे हैं इन्हीं नये प्रयासों में सैलाना बस स्टेंड से लोकेन्द्र सिनेमा व शहर सराय से गायत्री सिनेमा रोड़ को वन वे बनाने का विरोध आज के समाचार पत्रों में दिखाई दे रहा है। इसमें बताया गया है कि व्यापार सिर्फ 10 प्रतिशत ही रह गया है। वन वे होने से व्यापार इतना कम हो जाना गले नहीं उतरता। व्यवसाय करने के साथ—साथ, शहर की नई यातायात व्यवस्थाओं में सहयोग देना भी व्यापारिओं/नागरिकों का कर्तव्य है। हमेशा देखने में आता है कि अव्यवस्थाओं का दोष पूर्णत: प्रशासन को दिया जाता है। अब जब प्रशासन यातायात व्यवस्था सुधारने के लिये कुछ नई व्यवस्थाएं लागू कर रहा है तो इस प्रकार का अतार्किक विरोध रतलाम को पुन: वहीं ले जायेगा जहां हम सालों पहले थे।
इसी प्रकार से यातायात व्यवस्था में सहयोग के स्थान पर स्कूलों के द्वारा हाथ झटक कला का प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। अगर आपके परिसर में हजारों बच्चे आ रहे हैं तो उनकी व्यवस्था स्कूल परिसर के अंदर व बाहर करना भी स्कूल प्रबंधन का ही दायित्व है। इस प्रकार का लचर तर्क नहीं चल सकता कि ''आॅटो बच्चों के परिजन निजी रूप से करके भेजते हैं इसमें स्कूल वालों का कोई लेना देना नहीं है''
ऐसे तो मैरिज गार्डन वाले, शॉपिंग मॉल वाले, अन्य व्यापारी सभी अपने हाथ झटक लेंगे कि ''ग्राहक तो निजी वाहन से आये हैं। हम क्या करें?'' ऐसा असहयोगात्मक व्यवहार स्वीकार्य नहीं होना चाहिये। विशेषकर शहर के आंतरिक हिस्सों में चल रहे स्कूलों को आने वाले वाहनों जैसे आॅटो को तो परिसर के अंदर स्थान देना ही होगा। प्रशासन को पूर्ण सख्ती से इस प्रकार के रवैय्ये से निपटना चाहिये।
गुजराती समाज स्कूल के प्रबंधन की प्रशंसा की जानी चाहिये कि उन्होंने संबंधित वाहनों को अपने परिसर में व्यस्थित पार्किंग देकर बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए एक आदर्श प्रस्तुत किया है।
अनिल पेंडसे,रतलाम 9425103895
Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
Sunday, August 19, 2018
रतलाम की यातायात व्यवस्था सुधार के संबंध में सुझाव क्रमांक — 3
रतलाम की यातायात व्यवस्था सुधार के संबंध में सुझाव क्रमांक — 3
श्रीमान पुलिस अधीक्षक रतलाम की पहल पर यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु वॉट्सअप (7049127318) पर सुझाव चाहे गये हैं। इसी संदर्भ में ...
शहर के मध्य में स्थित St. Joseph's convent school की छुट्टी के समय पर विशेष यातायात व्यवस्था हेतु सुझाव।
स्कूल के आसपास के यातायात को समझने के दृष्टिकोण से देखें, तो प्रात:काल में व्यवस्था संबंधी कोई बडी परेशानी नहीं है। क्योंकि स्कूल के अतिरिक्त इस क्षेत्र की सारी दुकानें,कार्यालय जैसे स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया,कोर्ट आदि सभी प्रात: 10 बजे के पश्चात ही शुरू होते हैं। इसलिये सुबह के समय केवल विद्यार्थी आते हैं। उन्हें छोडने के लिये आने वाले ऑटो या अन्य वाहन भी छोडकर तुरंत चले जाते हैं। जिससे एक साथ भीड़ नहीं दिखती है।
लेकिन स्कूल की छुट्टी के समय लगभग 4 हजार विद्यार्थी, कई ऑटो, निजी चारपहिया वाहन व बडी संख्या में सायकल से जाने वाले बच्चे, इसके अलावा बैंक,कोर्ट व अन्य यात्री मिलाकर एक बहुत अस्तव्यस्त यातायात का दृश्य प्रतिदिन देखने को मिलता है। इस संपूर्ण क्षेत्र में समय विशेष के लिये अचानक भीड़भाड़ बढ़ जाती है।
हमें यह भी ज्ञात है कि वर्तमान में कान्वेंट स्कूल के पास फोरलेन सड़क का निर्माण हो रहा है। साथ ही कान्वेंट तिराहे से सैलाना बस स्टेंड तक फोरलेन भी प्रस्तावित है। रतलाम में कोई भी बडा कार्य पंचवर्षीय अवधी के बाद ही पूर्ण होता है। ऐसे में विशेष रूप से कान्वेंट स्कूल की छुट्टी के समय यातायात को व्यवस्थित करने हेतु निम्न सुझाव आपके समक्ष रखना चाहता हूँ।
1— विद्यार्थी सामान्य रूप से ऑटो,सायकल,पालकों के साथ वाहनों से या पैदल स्कूल आते हैं।
2— बच्चों को लेने आये सारे ऑटो बाहर न खडे रहें, आवश्यक रूप से स्कूल केंपस के अंदर 10 मिनिट पहले से लाईन में खडे रखे जायें।
3— सबसे पहले निजी चारपहिया/दोपहिया वाहनों से ड्राइवरों/पालकों के साथ जाने वाले बच्चों को छोडा जाये। जिससे स्कूल केंपस के बाहर की सड़क पहले खाली हो सके।
4— स्कूल से बाजार की ओर जाने वाले ऑटो Main gate से व सैलाना ओवरब्रिज,रेल्वेकॉलोनी हेतु LKG section gate से बाहर निकले।
5— सायकल से आने वाले बच्चों को 3—5 मिनिट के अंतर से छोडा जाये।
6— स्कूल के अत्यंत पास की कॉलोनियों व पैदल आने वाले बच्चों को सबसे अंत में छोडा जाये।
इस नई व्यवस्था को स्कूल प्रशासन की मदद से लागू किया जाकर एक साथ निकलने वाली भीड़ को बहुत आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। अन्य सुझावों को पढ़ने के लिये Label पर क्लिक करें
अनिल पेंडसे,रतलाम 9425103895
Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
श्रीमान पुलिस अधीक्षक रतलाम की पहल पर यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु वॉट्सअप (7049127318) पर सुझाव चाहे गये हैं। इसी संदर्भ में ...
शहर के मध्य में स्थित St. Joseph's convent school की छुट्टी के समय पर विशेष यातायात व्यवस्था हेतु सुझाव।
स्कूल के आसपास के यातायात को समझने के दृष्टिकोण से देखें, तो प्रात:काल में व्यवस्था संबंधी कोई बडी परेशानी नहीं है। क्योंकि स्कूल के अतिरिक्त इस क्षेत्र की सारी दुकानें,कार्यालय जैसे स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया,कोर्ट आदि सभी प्रात: 10 बजे के पश्चात ही शुरू होते हैं। इसलिये सुबह के समय केवल विद्यार्थी आते हैं। उन्हें छोडने के लिये आने वाले ऑटो या अन्य वाहन भी छोडकर तुरंत चले जाते हैं। जिससे एक साथ भीड़ नहीं दिखती है।
लेकिन स्कूल की छुट्टी के समय लगभग 4 हजार विद्यार्थी, कई ऑटो, निजी चारपहिया वाहन व बडी संख्या में सायकल से जाने वाले बच्चे, इसके अलावा बैंक,कोर्ट व अन्य यात्री मिलाकर एक बहुत अस्तव्यस्त यातायात का दृश्य प्रतिदिन देखने को मिलता है। इस संपूर्ण क्षेत्र में समय विशेष के लिये अचानक भीड़भाड़ बढ़ जाती है।
हमें यह भी ज्ञात है कि वर्तमान में कान्वेंट स्कूल के पास फोरलेन सड़क का निर्माण हो रहा है। साथ ही कान्वेंट तिराहे से सैलाना बस स्टेंड तक फोरलेन भी प्रस्तावित है। रतलाम में कोई भी बडा कार्य पंचवर्षीय अवधी के बाद ही पूर्ण होता है। ऐसे में विशेष रूप से कान्वेंट स्कूल की छुट्टी के समय यातायात को व्यवस्थित करने हेतु निम्न सुझाव आपके समक्ष रखना चाहता हूँ।
1— विद्यार्थी सामान्य रूप से ऑटो,सायकल,पालकों के साथ वाहनों से या पैदल स्कूल आते हैं।
2— बच्चों को लेने आये सारे ऑटो बाहर न खडे रहें, आवश्यक रूप से स्कूल केंपस के अंदर 10 मिनिट पहले से लाईन में खडे रखे जायें।
3— सबसे पहले निजी चारपहिया/दोपहिया वाहनों से ड्राइवरों/पालकों के साथ जाने वाले बच्चों को छोडा जाये। जिससे स्कूल केंपस के बाहर की सड़क पहले खाली हो सके।
4— स्कूल से बाजार की ओर जाने वाले ऑटो Main gate से व सैलाना ओवरब्रिज,रेल्वेकॉलोनी हेतु LKG section gate से बाहर निकले।
5— सायकल से आने वाले बच्चों को 3—5 मिनिट के अंतर से छोडा जाये।
6— स्कूल के अत्यंत पास की कॉलोनियों व पैदल आने वाले बच्चों को सबसे अंत में छोडा जाये।
इस नई व्यवस्था को स्कूल प्रशासन की मदद से लागू किया जाकर एक साथ निकलने वाली भीड़ को बहुत आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। अन्य सुझावों को पढ़ने के लिये Label पर क्लिक करें
अनिल पेंडसे,रतलाम 9425103895
Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
Tuesday, August 14, 2018
रतलाम की यातायात व्यवस्था सुधार के संबंध में सुझाव क्रमांक — 2
*रतलाम की यातायात व्यवस्था सुधार के संबंध में सुझाव क्रमांक — 2*
श्रीमान पुलिस अधीक्षक रतलाम की पहल पर यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु वॉट्सअप (7049127318) पर सुझाव चाहे गये हैं। इसी संदर्भ में ...
*शहर में बनने वाले फोरलेन पर सायकल ट्रैक व सायकल शेअरिंग स्टेशन का प्रावधान रखा जाये*।
पिछले दिनों हमारे शहर के पुलिस अधीक्षक महोदय को सायकल चलाते हुए देखकर प्रसन्नता हुई साथ में यह विचार भी आया कि हमारे शहर के हजारों बच्चे सायकल से स्कूल इसलिये नहीं जाते क्योंकि सड़क पर सायकल ट्रैक का प्रावधान ही नहीं है।
उल्लेखनीय है कि रतलाम शहर में कानवेंट स्कूल तिराहे से सैलाना बस स्टेंड तक नया फोरलेन बनने वाला है, साथ ही कई नई सड़कों का निर्माण निकट भविष्य में प्रस्तावित है। इनके बन जाने से राममंदिर से महू रोड़ बसस्टेंड तक फोरलेन हो जायेगा। ऐसे में शहर के मध्य से जाने वाले इस फोरलेन पर सायकल ट्रैक बनाकर स्कूल आने जाने वाले बच्चों को विशेष सुविधा देना चाहिये। जिससे पालक, अव्यवस्थित व असुरक्षित यातायात के भय से मुक्त होंगे व अपने बच्चों को सायकल से स्कूल भेजेंगे। यह पर्यावरण के लिये उपयुक्त होकर बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य में भी सहायक होगा।
साथ ही इस शहर के नागरिकों को सायकल शेअरिंग स्टेशन के प्रावधान से पर्यावरण की रक्षा के लिये प्रेरित भी किया जा सकेगा। यह व्यवस्था शहर की स्मार्ट सिटी रेंकिंग को सुधारने में भी सहायक होगी।
अधिक जानकारी के लिये google या youtube पर cycle sharing को सर्च कर जरूर देखें।
https://www.youtube.com/watch?v=Fm6LRfE1hCs
संलग्न — चित्र अवलोकनार्थ
अनिल पेंडसे,रतलाम 9425103895
Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
श्रीमान पुलिस अधीक्षक रतलाम की पहल पर यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु वॉट्सअप (7049127318) पर सुझाव चाहे गये हैं। इसी संदर्भ में ...
*शहर में बनने वाले फोरलेन पर सायकल ट्रैक व सायकल शेअरिंग स्टेशन का प्रावधान रखा जाये*।
पिछले दिनों हमारे शहर के पुलिस अधीक्षक महोदय को सायकल चलाते हुए देखकर प्रसन्नता हुई साथ में यह विचार भी आया कि हमारे शहर के हजारों बच्चे सायकल से स्कूल इसलिये नहीं जाते क्योंकि सड़क पर सायकल ट्रैक का प्रावधान ही नहीं है।
उल्लेखनीय है कि रतलाम शहर में कानवेंट स्कूल तिराहे से सैलाना बस स्टेंड तक नया फोरलेन बनने वाला है, साथ ही कई नई सड़कों का निर्माण निकट भविष्य में प्रस्तावित है। इनके बन जाने से राममंदिर से महू रोड़ बसस्टेंड तक फोरलेन हो जायेगा। ऐसे में शहर के मध्य से जाने वाले इस फोरलेन पर सायकल ट्रैक बनाकर स्कूल आने जाने वाले बच्चों को विशेष सुविधा देना चाहिये। जिससे पालक, अव्यवस्थित व असुरक्षित यातायात के भय से मुक्त होंगे व अपने बच्चों को सायकल से स्कूल भेजेंगे। यह पर्यावरण के लिये उपयुक्त होकर बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य में भी सहायक होगा।
साथ ही इस शहर के नागरिकों को सायकल शेअरिंग स्टेशन के प्रावधान से पर्यावरण की रक्षा के लिये प्रेरित भी किया जा सकेगा। यह व्यवस्था शहर की स्मार्ट सिटी रेंकिंग को सुधारने में भी सहायक होगी।
अधिक जानकारी के लिये google या youtube पर cycle sharing को सर्च कर जरूर देखें।
https://www.youtube.com/watch?v=Fm6LRfE1hCs
संलग्न — चित्र अवलोकनार्थ
अनिल पेंडसे,रतलाम 9425103895
Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
Saturday, August 11, 2018
रतलाम की यातायात व्यवस्था सुधार के संबंध में सुझाव क्रमांक — 1
*रतलाम की यातायात व्यवस्था सुधार के संबंध में सुझाव क्रमांक — 1*
श्रीमान पुलिस अधीक्षक रतलाम की पहल पर यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु वॉट्सअप (7049127318) पर सुझाव चाहे गये हैं। इसी संदर्भ में ...
उल्लेखनीय है कि रतलाम शहर, रेल्वे लाईन के कारण दो हिस्सों में बंट गया है। पुराना रतलाम व पटरी पार का नया रतलाम। प्रतिदिन आवागमन हेतु, सैंकडो नागरिकों की सुविधा के लिये इन दोनों क्षेत्रों को जोडने वाले मार्ग वर्तमान में इस प्रकार हैं डाट की पुल रोड़, सैलाना रोड़ ओवरब्रिज, हाट की चौकी वाली रोड़ व बाजना बस स्टेंड वाली पुलिया।
इसमें बाजना बस स्टेंड, हाट की चौकी व डाट की पुल तीनों स्थान पर नया रोड़ बनना प्रस्तावित है। ऐसे में इस संपूर्ण क्षेत्र के यातायात का लोड केवल सैलाना ओवर ब्रिज पर आना निश्चित है। *इसलिये हमें पहले से नये वेकल्पिक मार्ग बना लेना चाहिये*। जिससे इन मार्गों पर होने वाले निर्माणकार्य के चलते शहरवासियों को होने वाली भावी परेशानियों से बचाया जा सके।
सर्वप्रथम हमें रतलाम के यातायात को दो श्रेणियों में रखना होगा।
*पहली श्रेणी में फोर व्हिलर/थ्री व्हिलर वाहनों हेतु* व
*दूसरी श्रेणी में टू व्हिलर वाले वाहन चालकों हेतु*।
बडे फोर व्हिलर/थ्री व्हिलर वाहनों हेतु हमारे पास सैलाना ओवरब्रिज है। लेकिन दूसरी श्रेणी के टू व्हिलर वाहनों हेतु हमें छोटी—छोटी गलियों वाले वैकल्पिक मार्ग बनाने चाहिये जिससे इनका लोड़ मुख्य मार्गों पर न आकर छोटे वाहन चालकों को भी सुविधा होगी।
इसके लिये *गोमदडे की पुलिया का उपयोग करते हुए डाट की पुल जैसा अंडरब्रिज बनाने* पर पहले ध्यान देना चाहिये। जिससे एक सीधा रास्ता जवाहर नगर समेत बहुत बडे क्षेत्र के नागरिकों को सीधे पॉवरहॉउस रोड़ पर केनेरा बैंक के सामने निकास दिया जा सकता है। यह सिर्फ टू व्हिलर के लिये ही हो।
दूसरा *काटजू नगर—कस्तुरबा नगर के मध्य एक छोटा ब्रिज* बनाकर भी यातायात के लोड़ को कम किया जा सकता है। यह भी सिर्फ टू व्हिलर को ध्यान में रखकर ही बनाया जाये। फोर व्हिलर या बडे वाहन आवश्यक रूप से सिर्फ सैलाना ओवरब्रिज से ही आने जाने की सुविधा होना चाहिये।
जब बाजना बस स्टेंड वाला फोरलेन, हाट की चौकी वाला ओवरब्रिज व डाट की पुल से दो बत्ती वाला रोड़ बन जायेगा तब तक इन वैकल्पिक मार्गों से नागरिकों को बहुत आसानी होगी। हमें इस तथ्य को भी ध्यान रखना होगा की प्रमुख मार्गों पर बनने वाले *ये सभी निर्माण कार्य कम से कम पांच वर्षों पश्चात ही पूर्ण हो सकेंगे*।
संलग्न — सेटेलाईट चित्र अवलोकनार्थ
अनिल पेंडसे,रतलाम 9425103895
Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
श्रीमान पुलिस अधीक्षक रतलाम की पहल पर यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु वॉट्सअप (7049127318) पर सुझाव चाहे गये हैं। इसी संदर्भ में ...
उल्लेखनीय है कि रतलाम शहर, रेल्वे लाईन के कारण दो हिस्सों में बंट गया है। पुराना रतलाम व पटरी पार का नया रतलाम। प्रतिदिन आवागमन हेतु, सैंकडो नागरिकों की सुविधा के लिये इन दोनों क्षेत्रों को जोडने वाले मार्ग वर्तमान में इस प्रकार हैं डाट की पुल रोड़, सैलाना रोड़ ओवरब्रिज, हाट की चौकी वाली रोड़ व बाजना बस स्टेंड वाली पुलिया।
इसमें बाजना बस स्टेंड, हाट की चौकी व डाट की पुल तीनों स्थान पर नया रोड़ बनना प्रस्तावित है। ऐसे में इस संपूर्ण क्षेत्र के यातायात का लोड केवल सैलाना ओवर ब्रिज पर आना निश्चित है। *इसलिये हमें पहले से नये वेकल्पिक मार्ग बना लेना चाहिये*। जिससे इन मार्गों पर होने वाले निर्माणकार्य के चलते शहरवासियों को होने वाली भावी परेशानियों से बचाया जा सके।
सर्वप्रथम हमें रतलाम के यातायात को दो श्रेणियों में रखना होगा।
*पहली श्रेणी में फोर व्हिलर/थ्री व्हिलर वाहनों हेतु* व
*दूसरी श्रेणी में टू व्हिलर वाले वाहन चालकों हेतु*।
बडे फोर व्हिलर/थ्री व्हिलर वाहनों हेतु हमारे पास सैलाना ओवरब्रिज है। लेकिन दूसरी श्रेणी के टू व्हिलर वाहनों हेतु हमें छोटी—छोटी गलियों वाले वैकल्पिक मार्ग बनाने चाहिये जिससे इनका लोड़ मुख्य मार्गों पर न आकर छोटे वाहन चालकों को भी सुविधा होगी।
इसके लिये *गोमदडे की पुलिया का उपयोग करते हुए डाट की पुल जैसा अंडरब्रिज बनाने* पर पहले ध्यान देना चाहिये। जिससे एक सीधा रास्ता जवाहर नगर समेत बहुत बडे क्षेत्र के नागरिकों को सीधे पॉवरहॉउस रोड़ पर केनेरा बैंक के सामने निकास दिया जा सकता है। यह सिर्फ टू व्हिलर के लिये ही हो।
दूसरा *काटजू नगर—कस्तुरबा नगर के मध्य एक छोटा ब्रिज* बनाकर भी यातायात के लोड़ को कम किया जा सकता है। यह भी सिर्फ टू व्हिलर को ध्यान में रखकर ही बनाया जाये। फोर व्हिलर या बडे वाहन आवश्यक रूप से सिर्फ सैलाना ओवरब्रिज से ही आने जाने की सुविधा होना चाहिये।
जब बाजना बस स्टेंड वाला फोरलेन, हाट की चौकी वाला ओवरब्रिज व डाट की पुल से दो बत्ती वाला रोड़ बन जायेगा तब तक इन वैकल्पिक मार्गों से नागरिकों को बहुत आसानी होगी। हमें इस तथ्य को भी ध्यान रखना होगा की प्रमुख मार्गों पर बनने वाले *ये सभी निर्माण कार्य कम से कम पांच वर्षों पश्चात ही पूर्ण हो सकेंगे*।
संलग्न — सेटेलाईट चित्र अवलोकनार्थ
अनिल पेंडसे,रतलाम 9425103895
Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
Monday, August 6, 2018
रतलाम, रेल्वे कॉलोनी में सब्जीमंडी हेतु जगह आरक्षित करने हेतु सुझाव
प्रति,
श्रीमान डीआरएम महोदय,
पश्चिम रेल्वे, रतलाम
दिनांक 06/08/2018
विषय:— रेल्वे कॉलोनी में सब्जीमंडी हेतु जगह आरक्षित करने हेतु सुझाव।
आदरणीय श्रीमान,
रेल्वे विभाग ने अपने कर्मचारियों व उनके परिवार के सदस्यों के हितों को ध्यान में रखकर, एक अत्यंत शानदार व्यवस्था वाली रेल्वे कॉलोनी का निर्माण किया है। जिसमें चौडी सड़कें,खेल मैदान,हॉस्पिटल,विद्युत प्रदाय,जलप्रदाय,साफ—सफाई की व्यवस्था,स्कूल,जिम,सांस्कृतिक आयोजन हेतु स्थान व अन्य कई सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध हैं।
लेकिन यहॉं रहने वाले कर्मचारियों को सब्जी खरीदने जैसी दैनिक आवश्यकता हेतु शहर के अन्य हिस्सों पर निर्भर रहना होता है। साथ ही इसके कारण डाट की पुल क्षेत्र जो कि संपूर्ण रेल्वेकॉलोनी व इससे जुडी अन्य कॉलोनियों का मुख्य प्रवेशद्वार है। जहां अवैध सब्जीमंडी होना भीड़भाड़ का कारण बनता है। इससे रेल्वे कॉलोनी का अंदरूनी मुख्य मार्ग भी कई बार बाधित व गंदा रहता है। इसके पहले भी कई बार अतिक्रमण हटाने के असफल प्रयास हो चुके हैं लेकिन कुछ ही दिनों के बाद फिर वही स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
इसे ध्यान में रखते हुए मेरा सुझाव है कि रेल्वे कॉलोनी में ही डाट की पुल क्षेत्र से अंदर रेल्वे कॉलोनी वाले हिस्से में पटरियों के पास या इंडियन आॅयल के पुराने डिपो के पास व्यवस्थित टीनशेड वाली दुकानों का निर्माण किया जाता है तो इससे रेल्वे को आय होने के साथ साथ डाट की पुल पर यातायात नियंत्रण में भी बहुत बडा योगदान होगा।
उल्लेखनीय है कि डीआरएम कार्यालय जो कि रतलाम की शान होकर, उसके सामने बाहर लगे ट्रांसफॉर्मर को हटाने के बाद से इस कार्यालय की सुंदरता देखने लायक हो गई है। साथ ही दोबत्ती से लगाकर डाट की पुल तक के क्षेत्र में नई चौडी सड़क का निर्माण भी प्रस्तावित है, ऐसे में कर्मचारियों के हित को देखते हुए रेल्वे कॉलोनी के अंदर किसी भी उचित स्थल पर व्यवस्थित शेड निर्माण कर इस समस्या का स्थायी समाधान आपके कार्यकाल में किया जाना हमेशा के लिये याद रखा जायेगा।
अनिल पेंडसे 9425103895
Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
प्रतिलिपि — शहर विकास से संबंधित सभी प्रमुख संस्थान,अधिकारी,नेतृत्व,समाजसेवी व समाचार पत्र
श्रीमान डीआरएम महोदय,
पश्चिम रेल्वे, रतलाम
दिनांक 06/08/2018
विषय:— रेल्वे कॉलोनी में सब्जीमंडी हेतु जगह आरक्षित करने हेतु सुझाव।
आदरणीय श्रीमान,
रेल्वे विभाग ने अपने कर्मचारियों व उनके परिवार के सदस्यों के हितों को ध्यान में रखकर, एक अत्यंत शानदार व्यवस्था वाली रेल्वे कॉलोनी का निर्माण किया है। जिसमें चौडी सड़कें,खेल मैदान,हॉस्पिटल,विद्युत प्रदाय,जलप्रदाय,साफ—सफाई की व्यवस्था,स्कूल,जिम,सांस्कृतिक आयोजन हेतु स्थान व अन्य कई सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध हैं।
लेकिन यहॉं रहने वाले कर्मचारियों को सब्जी खरीदने जैसी दैनिक आवश्यकता हेतु शहर के अन्य हिस्सों पर निर्भर रहना होता है। साथ ही इसके कारण डाट की पुल क्षेत्र जो कि संपूर्ण रेल्वेकॉलोनी व इससे जुडी अन्य कॉलोनियों का मुख्य प्रवेशद्वार है। जहां अवैध सब्जीमंडी होना भीड़भाड़ का कारण बनता है। इससे रेल्वे कॉलोनी का अंदरूनी मुख्य मार्ग भी कई बार बाधित व गंदा रहता है। इसके पहले भी कई बार अतिक्रमण हटाने के असफल प्रयास हो चुके हैं लेकिन कुछ ही दिनों के बाद फिर वही स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
इसे ध्यान में रखते हुए मेरा सुझाव है कि रेल्वे कॉलोनी में ही डाट की पुल क्षेत्र से अंदर रेल्वे कॉलोनी वाले हिस्से में पटरियों के पास या इंडियन आॅयल के पुराने डिपो के पास व्यवस्थित टीनशेड वाली दुकानों का निर्माण किया जाता है तो इससे रेल्वे को आय होने के साथ साथ डाट की पुल पर यातायात नियंत्रण में भी बहुत बडा योगदान होगा।
उल्लेखनीय है कि डीआरएम कार्यालय जो कि रतलाम की शान होकर, उसके सामने बाहर लगे ट्रांसफॉर्मर को हटाने के बाद से इस कार्यालय की सुंदरता देखने लायक हो गई है। साथ ही दोबत्ती से लगाकर डाट की पुल तक के क्षेत्र में नई चौडी सड़क का निर्माण भी प्रस्तावित है, ऐसे में कर्मचारियों के हित को देखते हुए रेल्वे कॉलोनी के अंदर किसी भी उचित स्थल पर व्यवस्थित शेड निर्माण कर इस समस्या का स्थायी समाधान आपके कार्यकाल में किया जाना हमेशा के लिये याद रखा जायेगा।
अनिल पेंडसे 9425103895
Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
प्रतिलिपि — शहर विकास से संबंधित सभी प्रमुख संस्थान,अधिकारी,नेतृत्व,समाजसेवी व समाचार पत्र
Wednesday, July 25, 2018
रतलाम रेल्वे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकिट लेने पर वाहन पार्किंग नि:शुल्क हो
श्रीमान डीआरएम महोदय,
रतलाम
22/07/2018
पार्किंग शुल्क के संदर्भ में
आदरणीय श्रीमान,
रतलाम रेल्वे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकिट लेने पर निजी दोपहिया वाहन पार्किंग नि:शुल्क उपलब्ध होना चाहिये।
आज रेल्वे स्टेशन पर अपने बेटे को छोडने के लिये गया था तब दोपहिया वाहन की पार्किंग के लिये ₹10 का शुल्क भुगतान किया, फिर प्लेटफॉर्म पर जाने के पहले प्लेटफॉर्म टिकिट का शुल्क ₹10 का भी भुगतान किया। मुझे लगता है कि जिस यात्री के पास प्लेटफार्म टिकिट है उसे पार्किंग नि:शुल्क उपलब्ध होना चाहिये जो कि उसका अधिकार है।
कृपया उचित कार्यवाही अपेक्षित
धन्यवाद
अनिल पेेंडसे 9425103895
रतलाम
रतलाम
22/07/2018
पार्किंग शुल्क के संदर्भ में
आदरणीय श्रीमान,
रतलाम रेल्वे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकिट लेने पर निजी दोपहिया वाहन पार्किंग नि:शुल्क उपलब्ध होना चाहिये।
आज रेल्वे स्टेशन पर अपने बेटे को छोडने के लिये गया था तब दोपहिया वाहन की पार्किंग के लिये ₹10 का शुल्क भुगतान किया, फिर प्लेटफॉर्म पर जाने के पहले प्लेटफॉर्म टिकिट का शुल्क ₹10 का भी भुगतान किया। मुझे लगता है कि जिस यात्री के पास प्लेटफार्म टिकिट है उसे पार्किंग नि:शुल्क उपलब्ध होना चाहिये जो कि उसका अधिकार है।
कृपया उचित कार्यवाही अपेक्षित
धन्यवाद
अनिल पेेंडसे 9425103895
रतलाम
Sunday, July 22, 2018
रतलाम — शवयात्रा का बाजार से निकलना।
रतलाम — शवयात्रा का बाजार से निकलना।
आज मैं एक शवयात्रा में गया था। जो कि आबकारी चौराहा होते हुए त्रिवेणी मुक्तिधाम की ओर जा रही थी। मार्ग में एक बडी शोभायात्रा चल रही थी इसलिये शववाहन को चांदनीचौक के स्थान पर बजाजखाना होते हुए चौमुखीपुल, रामगढ़ व अन्य तंग गलियों से होते हुए त्रिवेणी तक ले जाया गया।
मेरा विचार यह है कि जब भी कोई शोभायात्रा या अन्य सार्वजनिक आयोजन सड़कों पर किये जाते हैं ऐसे समय सड़क का आधा हिस्सा अनिवार्य रूप से अन्य आने जाने वाले लोगों, एंबुलेंस, शववाहन आदि के लिये छोडा जाये। यह तभी संभव है जब इस प्रकार के सार्वजनिक आयोजन समिति के सदस्य इस बात का ध्यान रखें, साथ ही मार्ग अतिक्रमण मुक्त भी हों।
इस बार यातायात सुधार से संबंधित नई मुहिम शुरू हो रही है तो इसका पहला कार्य अतिक्रमण मुक्त बाजार हो। जिससे यातायात से संबंधित 90% समस्याएं समाप्त हो जायेंगी।
आज मैं एक शवयात्रा में गया था। जो कि आबकारी चौराहा होते हुए त्रिवेणी मुक्तिधाम की ओर जा रही थी। मार्ग में एक बडी शोभायात्रा चल रही थी इसलिये शववाहन को चांदनीचौक के स्थान पर बजाजखाना होते हुए चौमुखीपुल, रामगढ़ व अन्य तंग गलियों से होते हुए त्रिवेणी तक ले जाया गया।
मेरा विचार यह है कि जब भी कोई शोभायात्रा या अन्य सार्वजनिक आयोजन सड़कों पर किये जाते हैं ऐसे समय सड़क का आधा हिस्सा अनिवार्य रूप से अन्य आने जाने वाले लोगों, एंबुलेंस, शववाहन आदि के लिये छोडा जाये। यह तभी संभव है जब इस प्रकार के सार्वजनिक आयोजन समिति के सदस्य इस बात का ध्यान रखें, साथ ही मार्ग अतिक्रमण मुक्त भी हों।
इस बार यातायात सुधार से संबंधित नई मुहिम शुरू हो रही है तो इसका पहला कार्य अतिक्रमण मुक्त बाजार हो। जिससे यातायात से संबंधित 90% समस्याएं समाप्त हो जायेंगी।
Tuesday, September 26, 2017
रतलाम बनाने वालों को जलेबी ज्यादा पसंद रही होगी
रतलाम बनाने वालों को जलेबी ज्यादा पसंद रही होगी
रतलाम की सारी सड़कें जलेबी जैसी गोल गोल घुमावदार हैं। जैसे दो बत्ती से कॉन्वेंट स्कूल गोल, दो बत्ती से छत्री पुल गोल, दो बत्ती से न्यू रोड़ गोल, दो बत्ती से पॉवर हाउस रोड़ गोल, दो बत्ती से फ्रीगंज गोल, इंदिरा नगर मेन रोड़ गोल, कस्तूरबा नगर मेन रोड़ गोल, सैलाना बस स्टैंड से गायत्री सिनेमा रोड़ गोल, सैलाना बस स्टैंड से लोकेन्द्र सिनेमा गोल, लोकेन्द्र सिनेमा से जेल रोड़ गोल,डालूमोदी बाजार से घांस बाजार गोल, थावरिया बाजार ........
अगर कुछ सीधी लाइन में है तो लोहार रोड से त्रिपोलिया गेट ! (गूगल अर्थ पर देख लो )
जी हां! किसी ज़माने में किसी व्यक्ति ने उसकी सुविधा से बरसात के मौसम में कोई पगडंडी बना दी होगी, रतलाम नगर निगम ने उसी पर डामर पोत दिया।
हद तो तब हो गई जब कॉर्पोरेशन(कर—परेशान) भी यही करे। रिलायंस पेट्रोल पम्प से राजस्व कालोनी गोल...... आपको क्या लगता है क्या रतलाम के इंजीनियरों को सीधी लाइन खींचना नहीं आती?
सीवरेज का पाईप,जल वितरण का पाईप,टेलिफोन वायर,बिजली कनेक्शन का वायर, केबल टीवी का वायर, भविष्य में कुकिंग गैस लाईन इन गोल—गोल गलियों में कैसे लगाई जा सकेगी? स्कूल बसें इन गलियों से कैसे निकलेंगी? फायर ब्रिगेड क्या यहॉं तक पहुॅंच सकेगा? कोई भी कॉलोनाईज़र 25—50 प्लाट के साथ कोई कॉलोनी/परिसर काट दे, पर उसके रहवासी मूलभूत सुविधाओं को कैसे प्राप्त करेंगे? इसको लेकर उसकी कोई जबावदारी नहीं बनती। जैसा रायता फैलाना है फैला सकते हैं।
आज सभी का फोकस छत्रीपुल पर है... कल सागोद रोड़ की पुलिया या डाट की पुलिया पर होगा क्या फर्क पड़ जायेगा।
😡
कोई दूरदृष्टि नहीं। भविष्य के रतलाम की बनावट को लेकर कोई स्पष्ट सोच नहीं। जब कोई बडी दुर्घटना हो जायेगी तब की तब देखेंगे वाली नीतियॉं ही इस प्रकार के जनाक्रोश का कारण बनती रहेगी।
चंडीगढ़ से भी पहले, ज्यादा दूर नहीं इंदौर को देख लो और जान लो विकास क्या होता है।
अनिल पेंडसे 9425103895
रतलाम की सारी सड़कें जलेबी जैसी गोल गोल घुमावदार हैं। जैसे दो बत्ती से कॉन्वेंट स्कूल गोल, दो बत्ती से छत्री पुल गोल, दो बत्ती से न्यू रोड़ गोल, दो बत्ती से पॉवर हाउस रोड़ गोल, दो बत्ती से फ्रीगंज गोल, इंदिरा नगर मेन रोड़ गोल, कस्तूरबा नगर मेन रोड़ गोल, सैलाना बस स्टैंड से गायत्री सिनेमा रोड़ गोल, सैलाना बस स्टैंड से लोकेन्द्र सिनेमा गोल, लोकेन्द्र सिनेमा से जेल रोड़ गोल,डालूमोदी बाजार से घांस बाजार गोल, थावरिया बाजार ........
अगर कुछ सीधी लाइन में है तो लोहार रोड से त्रिपोलिया गेट ! (गूगल अर्थ पर देख लो )
जी हां! किसी ज़माने में किसी व्यक्ति ने उसकी सुविधा से बरसात के मौसम में कोई पगडंडी बना दी होगी, रतलाम नगर निगम ने उसी पर डामर पोत दिया।
हद तो तब हो गई जब कॉर्पोरेशन(कर—परेशान) भी यही करे। रिलायंस पेट्रोल पम्प से राजस्व कालोनी गोल...... आपको क्या लगता है क्या रतलाम के इंजीनियरों को सीधी लाइन खींचना नहीं आती?
सीवरेज का पाईप,जल वितरण का पाईप,टेलिफोन वायर,बिजली कनेक्शन का वायर, केबल टीवी का वायर, भविष्य में कुकिंग गैस लाईन इन गोल—गोल गलियों में कैसे लगाई जा सकेगी? स्कूल बसें इन गलियों से कैसे निकलेंगी? फायर ब्रिगेड क्या यहॉं तक पहुॅंच सकेगा? कोई भी कॉलोनाईज़र 25—50 प्लाट के साथ कोई कॉलोनी/परिसर काट दे, पर उसके रहवासी मूलभूत सुविधाओं को कैसे प्राप्त करेंगे? इसको लेकर उसकी कोई जबावदारी नहीं बनती। जैसा रायता फैलाना है फैला सकते हैं।
आज सभी का फोकस छत्रीपुल पर है... कल सागोद रोड़ की पुलिया या डाट की पुलिया पर होगा क्या फर्क पड़ जायेगा।
😡
कोई दूरदृष्टि नहीं। भविष्य के रतलाम की बनावट को लेकर कोई स्पष्ट सोच नहीं। जब कोई बडी दुर्घटना हो जायेगी तब की तब देखेंगे वाली नीतियॉं ही इस प्रकार के जनाक्रोश का कारण बनती रहेगी।
चंडीगढ़ से भी पहले, ज्यादा दूर नहीं इंदौर को देख लो और जान लो विकास क्या होता है।
अनिल पेंडसे 9425103895
Friday, September 15, 2017
दो वर्ष की इभ्या की सहमति कौन और कैसे लेगा?
नीमच के अनामिका व सुमित राठौर दीक्षा ले रहे हैं। क्या इभ्या के वयस्क होने के पहले उसको उसके माता पिता के प्रेम से वंचित कर दी जाने वाली दीक्षा संभव है? क्या अपने मातृत्व,पितृत्व रूपी कर्तव्यों को इस प्रकार से अधर में छोड कर दीक्षा लेना उचित है? क्या दीक्षा दिलाने वाले आचार्य ने व सहमति देने वाले परिवार के सदस्यों ने इभ्या की ओर से इस प्रकार की दीक्षा पर भी कभी विचार किया है? क्या सर्व सामान्य जनमानस के मन में उभरते हजारों प्रश्नों पर कोई उत्तर है?
इसके पहले भी कक्षा 12वीं के एक टॉपर बच्चे ने दीक्षा लेने के समाचार पढने को मिले थे। जबकि उसके परिवार के सदस्य पूर्ण सहमत नहीं थे यह भी समाचार पत्रों से ही जानकारी प्राप्त हुई थी।
ऐसे समाचारों को पढ़कर ऐसा लगता है कि *ऐसे युवा जिनको अभी समाज के विकास में अपनी भागीदारी निभानी बाकि है* विशेष कर *इस आयु में* क्या इस प्रकार के निर्णय उचित प्रतीत होते हैं। क्या शिक्षित बच्चों को राष्ट्र की मुख्यधारा में रहते हुए, अपने कर्तव्यों के पालन के स्थान पर ऐसा निर्णय उचित है? ऐसे निर्णयों का विवेचन धार्मिक बनकर नहीं वरन सामान्य मानव होकर करना होगा।
Wednesday, September 13, 2017
Sunday, January 31, 2016
सब्जीमंडी की समस्याएं, संभावनाएं और हमारे प्रयत्न
सब्जीमंडी की समस्याएं, संभावनाएं और हमारे प्रयत्न
रतलाम शहर के विकास हेतु जनसामान्य व्दारा की गई एक सकारात्मक पहल
किसी भी शहर में सार्वजनिक व्यवस्थाओं को लेकर समस्याएं होना एक अत्यंत सामान्य सी बात है, लेकिन उन सभी समस्याओं में से किसी एक समस्या विशेष को लेकर उसके सभी पहलुओं को जानने के लिये शहर के जागरूक नागरिकों व्दारा सर्वे किया जाना, समस्या का बारीकि से अध्ययन करना एवं उसकी एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर शासन को दिया जाना इस सकारात्मक पहल को विशेष बनाता है।
रतलाम के नागरिकों व्दारा शहर में लगने वाली सब्जी मंडियों को लेकर एक सर्वे किया गया। इस सर्वे को करने के दौरान ऐसा स्पष्ट प्रतीत होता है कि बहुत सारी समस्याओं के बीच में अंर्तसंबंध होता है। अगर एक समस्या विशेष को लक्ष्य बनाकर उसको जड से ठीक करने का प्रयत्न किया जाये तो दूसरी बहुत सारी समस्याएं जो उस पर निर्भर करती हैं अपने आप ही सुलझ जायेंगी। अगर शहर में व्यवस्थित सब्जी मंडियों का निर्माण हो जाता है तो इसका सीधा संबंध सफाई व्यवस्था, आवारा पशु, ट्राफिक जाम, भीड नियंत्रण, अवैध वसूली, ईंधन खपत, प्रदूषण व इससे संबंधित अन्य कई समस्याओं समेत इनका सीधा ही निराकरण हो जायेगा।
अभी कुछ दिनों पहले आपने विभिन्न समाचार पत्रों और टी.वी. चैनलों पर निश्चित रूप से देखा होगा कि दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चैन्नई में प्राकृतिक आपदा ‘बाढ़‘ के रूप में आने के बाद चैन्नई शहर का क्या हाल हुआ। अत्यंत सामान्य बुद्धि रखने वाला व्यक्ति भी बता सकता है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम जैसे सार्वजनिक व्यवस्थाओं को दिशा देने वाले विभाग इस शहर में ड्रेनेज और प्लानिंग में फेल हो गये। इससे सबक लेते हुए यदि हम हमारे रतलाम शहर के विकास को सही दिशा दे सके तो आने वाली पीढियाॅं निश्चित रूप से हमारी आभारी रहेंगी।
हमारा आप सभी से विशेष आग्रह है कि इस रिपोर्ट को पढने के साथ-साथ अगर कम्प्यूटर-इंटरनेट-गूगल अर्थ के उपयोग से रतलाम शहर का सूक्ष्म अध्ययन करें तो हम पायेंगे कि बीते कुछ वर्षों में रतलाम शहर अत्यंत बेतरतीब तरीके से चारों दिशाओं में बढता जा रहा है। इसके उपरांत भी अगर हमारे शहर को बचाने का प्रयत्न किया जाये तो भी गलतियों के दुष्परिणामों को कम किया जा सकता है।
आज के रतलाम को रेल्वे लाईन दो हिस्सों में बांटती है। इसलिये पुराना रतलाम व पटरी पार का नया रतलाम के बारे में हमें अलग अलग सोचना होगा। इस बारे में किसी भी निर्णय पर पहुॅंचने के पहले हमें वर्तमान में कितनी सब्जी मंडियाॅं है व उनमें क्या समस्याएं है उन पर विचार करना होगा। वर्तमान सब्जी मंडियों के नाम व स्थान इस प्रकार हैं।
इन सभी सब्जी मंडीयों के नाम जानने के बाद आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि व्यवस्थित प्लानिंग के साथ बनाई गई एकमात्र, ऐतिहासिक माणकचौक स्थित सब्जीमंडी ही वैध है उल्लेखनीय है कि माणकचौक सब्जीमंडी उस समय की जनसंख्या को ध्यान में रखकर बनाई गई थी बाकि की लगभग सारी सब्जीमंडियाॅं अवैध होकर सड़क पर लगा ली जाती हैं। आज की तिथि में किसी भी शासकीय विभाग का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है।
रतलाम शहर में रहने वाले 100 प्रतिशत परिवार लगभग प्रतिदिन या हर दूसरे दिन सब्जी खरीदते हैं। प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह किसी भी नौकरी या व्यवसाय से जुडा है अपने परिवार के लिये सब्जी जरूर लेता है। लेकिन यह जानकर अत्यंत आश्चर्य हुआ कि राजाओं के जमाने से चली आ रही माणकचौक सब्जीमंडी के बाद आज तक किसी अन्य फुटकर सब्जी मंडी के बनाने को लेकर कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया गया। इसलिये संपूर्ण शहर को सब्जीमंडी में बदलने से रोकने, सभी वैध-अवैध सब्जी मंडियों की व्यवस्थाओं में आमूलचूल परिवर्तन करने, सुधार करने के दृष्टिकोण से, जागरूक नागरिकों व्दारा स्थानीय प्रशासन को एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट के माध्यम से सुझाव देने का निर्णय लिया गया। जिससे सब्जीमंडी के मामले में अपने शहर को वास्तविकता में अमृत-स्मार्ट सिटी के रूप में बदलता हुआ देखा जा सके।
खाद्य विभाग के नियंत्रण की चिंता किये बिना किसी भी व्यक्ति को सब्जी बेचना है तो वो कहीं पर भी किसी भी स्थिति में बेच सकता है उन स्थितियों में उसे सब्जी खरीदने वाले ग्राहक भी मिल जाते हैं। कहीं सड़क पर, किसी नाली के पास, किसी गंदगी के ढेर के पास, भिनभिनाती मक्खियों, मच्छरों के मधुर संगीत के साथ, मनुष्यों के साथ-साथ गाय, सांड, कुत्ते भी इस सड़क पर बनी सब्जीमंडी में आपका स्वागत करते दिखाई देते हैं।
अत्यंत महत्वपूर्ण व प्रत्येक परिवार की दैनिक आवश्यकता को पूर्ण करने वाली सब्जी मंडियां कहॉं और किन सुविधाओं के साथ होना चाहिये? इस संदर्भ में नागरिकों व सब्जी विक्रेताओं की क्या अपेक्षाएं है इस बारे में जानकारी एकत्र करने का प्रयत्न किया गया। सारी जानकारी एकत्रिकरण करने वाले स्वप्रेरित कार्यकर्ता किसी व्यावसायिक सर्वे टीम की तरह कार्य शायद न कर सकें हो परंतु उदेश्य स्पष्ट व सकारात्मक था। रतलाम शहर में इस प्रकार का सर्वे करने का शायद यह पहला प्रयास था जिसमें सोशल मीडिया का भी भरपूर उपयोग किया गया। सामान्य नागरिकों ने भी इस प्रयास के लिये जोरदार समर्थन देते हुए सोशल मीडिया पर इसे हाथोहाथ लिया। जिसमें हमने दिनांक 31 जनवरी 2016 तक फोनकाॅल-व्यग्तिगत भेट-वॉट्सअप-ईमेल आदि के माध्यम से सुझाव प्राप्त किये। सभी प्राप्त सुझावों को संकलित-संपादित कर यह फायनल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई गई है। संपूर्ण शहर को इस अव्यवस्था व गंदगी से बचाने के लिये निम्न बिंदुओं पर विचार किया जाना चाहिये।
रतलाम शहर में सब्जी मंडियों की व्यवस्था में सुधार के लिये, आने वाले 50 वर्षों की प्लानिंग को ध्यान में रखते हुए नागरिकों, व्यापारियों के व्दारा बताये गये महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं।
नई सब्जीमंडीयों के निर्माण के लिये जनता व्दारा विभिन्न स्थानों का सुझाव।
उपरोक्त सभी तथ्यों पर विचार करने के पश्चात नई सब्जीमंडियाॅं कहाॅं पर होना चाहिये इसके लिये विभिन्न सुझाव प्राप्त हुए हैं।
1 अमृत सागर बगीचे के सामने रिक्त भूमि पर एक बहुत बढिया आधुनिक सब्जीमंडी बनाई जा सकती है। जिससे एक बहुत बडे, घनी जनसंख्या वाले क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों की लंबे समय से होने वाली मंाग को पूर्ण किया जा सकता है एवं चांदनीचौक, कसारा बाजार, लक्कडपीठा क्षेत्र में यातायात, स्वच्छता में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त की जा सकती है।
2 सागोद रोड पर जैन स्कूल के पीछे रिक्त भूमि पर भी व्यवस्थित बडी सब्जीमंडी बनाई जा सकती है इससे इस क्षेत्र के नागरिकों को सुविधा देने के साथ साथ नीमचौक व आसपास के मेन रोड वाले क्षेत्र को गंदगी मुक्त किया जा सकेगा।
3 सैलाना बस स्टेंड स्थित मंडी में विश्व स्तरीय व्यवस्था की जा सकती है जिससे वेदव्यास काॅलोनी, काटजू नगर, पत्रकार काॅलोनी, शास्त्री नगर, न्यू रोड, लोकेंद्र टाॅकिज, शहर सराय आदि क्षेत्र के नागरिकों को सुविधा दी जा सके। सिविक सेंटर के पीछे रिक्त भूमि पर भी एक बडी सार्वजनिक सब्जीमंडी बनाई जा सकती है।
4 सैलाना बस स्टेंड से राममंदिर की और जाने वाले ओवरब्रिज के नीचे रेल्वे लाईन के दोनों तरफ भी आसपास के क्षेत्र अर्थात काटजू नगर व पटरी पार कस्तुरबा व जवाहर नगर के लिये उपयुक्त सब्जी मंडी बनाई जा सकती है।
5 राजस्व काॅलोनी व विद्युत मंडल कार्यालय के बीच का हिस्सा अर्थात गोमदडे की पुलिया वाला रिक्त भूभाग भी उपयोग में लिया जा सकता है।
6 न्यू रोड के पीछे की ओर साइंस एंड आर्ट्स काॅलेज से लगे रिक्त भूखंड पर भी इसके लिये प्लानिंग की जा सकती है।
7 आंबेडकर भवन के पास रिक्त बडे भूखंड पर भी इस संपूर्ण क्षेत्र को ध्यान में रखकर इसका उपयोग बहुत बडी आधुनिक सब्जीमंडी, पार्किंग आदि के लिये किया जा सकता है। सर्वविदित है कि सब्जीमंडी दैनिक आवश्यकता है धार्मिक व अन्य सामाजिक कार्यक्रमों को शहर से बाहर पांडालों की व्यवस्था की जा सकती है।
8 वर्तमान सर्किट हाउस को शहर से बाहर दूर बनाकर उस स्थान पर भी एक बडा मार्केट आदि बनाया जा सकता है। जिससे वी.आय.पी. मूवमेंट में भी नागरिकों को सुरक्षा के नाम पर होने वाली असुविधा से बचाया जा सकेगा।
9 टी.आय.टी. रोड पर लगने वाली सब्जी मंडी को इसी स्थान पर बने शासकीय औषधालय वाले भवन को पुर्ननिर्माण कर भूतल पर पक्की नई सब्जीमंडी व प्रथम तल पर शासकीय औषधालय आदि लगाया जा सकता है।
10 नगर निगम के वर्तमान कार्यालय को महू रोड़ पर नये बनने वाले कलेक्टोरेट भवन के आसपास किसी अन्य स्थान पर ले जाया जाकर वर्तमान नगर निगम वाले स्थान पर भी बडा व्यावसायिक मार्केट बनाया जा सकता है। जिससे महलवाडा परिसर व आसपास के बडे रहवासी क्षेत्र को स्थायी समाधान दिया जा सकता है।
11 जिला जेल भवन को भी शहर से बाहर बनाकर उस स्थान का उपयोग सार्वजनिक हित के किसी अन्य आवश्यक कार्य में किया जाना नागरिकों के हित में होगा।
12 रेल्वे लाईन के दूसरी ओर जवाहर नगर में इंडियन आॅयल के पुराने डिपो व इसके आसपास पडी रिक्त भूमि पर भी इस संपूर्ण क्षेत्र को ध्यान में रखकर बडी आधुनिक सब्जीमंडी बनाई जा सकती है। इससे राम मंदिर क्षेत्र , फोरलेन, डाट की पुल, रेल्वे काॅलोनी मेन रोड़ पर यातायात का दबाव भी कम किया जा सकेगा।
13 इसके अलावा संपूर्ण शहर के मध्य में जितने भी बडे-बडे भूखण्ड कई वर्षों से रिक्त अवस्था में पडे हैं उनको अधिग्रहित कर उपयोग में लिया जाना जन-सामान्य नागरिकों के हित में होगा।
14 चौडावास(रामगढ़), गढ़कैलाश (अमृतसागर), महलवाडा के अंदर मैदान में, त्रिवेणी ग्राउंड, बिरियाखेडी, 80 फीट रोड़, बड़बड़ के आसपास वाला क्षेत्र आदि स्थानों के बारे में भी सुझाव आये हैं।
इस संपूर्ण प्रक्रिया का उदेश्य हमारे नेतृत्व को इस बारे में गंभीर विचार के लिये प्रोत्साहित कर इसे वास्तविकता में साकार करना है।
रतलाम की जनता की ओर से जनता को समर्पित
संकलनकर्ता:- अनिल पेंडसे 525 काटजू नगर रतलाम
मो. 9425103895 Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
रतलाम शहर के विकास हेतु जनसामान्य व्दारा की गई एक सकारात्मक पहल
किसी भी शहर में सार्वजनिक व्यवस्थाओं को लेकर समस्याएं होना एक अत्यंत सामान्य सी बात है, लेकिन उन सभी समस्याओं में से किसी एक समस्या विशेष को लेकर उसके सभी पहलुओं को जानने के लिये शहर के जागरूक नागरिकों व्दारा सर्वे किया जाना, समस्या का बारीकि से अध्ययन करना एवं उसकी एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर शासन को दिया जाना इस सकारात्मक पहल को विशेष बनाता है।
रतलाम के नागरिकों व्दारा शहर में लगने वाली सब्जी मंडियों को लेकर एक सर्वे किया गया। इस सर्वे को करने के दौरान ऐसा स्पष्ट प्रतीत होता है कि बहुत सारी समस्याओं के बीच में अंर्तसंबंध होता है। अगर एक समस्या विशेष को लक्ष्य बनाकर उसको जड से ठीक करने का प्रयत्न किया जाये तो दूसरी बहुत सारी समस्याएं जो उस पर निर्भर करती हैं अपने आप ही सुलझ जायेंगी। अगर शहर में व्यवस्थित सब्जी मंडियों का निर्माण हो जाता है तो इसका सीधा संबंध सफाई व्यवस्था, आवारा पशु, ट्राफिक जाम, भीड नियंत्रण, अवैध वसूली, ईंधन खपत, प्रदूषण व इससे संबंधित अन्य कई समस्याओं समेत इनका सीधा ही निराकरण हो जायेगा।
अभी कुछ दिनों पहले आपने विभिन्न समाचार पत्रों और टी.वी. चैनलों पर निश्चित रूप से देखा होगा कि दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चैन्नई में प्राकृतिक आपदा ‘बाढ़‘ के रूप में आने के बाद चैन्नई शहर का क्या हाल हुआ। अत्यंत सामान्य बुद्धि रखने वाला व्यक्ति भी बता सकता है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम जैसे सार्वजनिक व्यवस्थाओं को दिशा देने वाले विभाग इस शहर में ड्रेनेज और प्लानिंग में फेल हो गये। इससे सबक लेते हुए यदि हम हमारे रतलाम शहर के विकास को सही दिशा दे सके तो आने वाली पीढियाॅं निश्चित रूप से हमारी आभारी रहेंगी।
हमारा आप सभी से विशेष आग्रह है कि इस रिपोर्ट को पढने के साथ-साथ अगर कम्प्यूटर-इंटरनेट-गूगल अर्थ के उपयोग से रतलाम शहर का सूक्ष्म अध्ययन करें तो हम पायेंगे कि बीते कुछ वर्षों में रतलाम शहर अत्यंत बेतरतीब तरीके से चारों दिशाओं में बढता जा रहा है। इसके उपरांत भी अगर हमारे शहर को बचाने का प्रयत्न किया जाये तो भी गलतियों के दुष्परिणामों को कम किया जा सकता है।
आज के रतलाम को रेल्वे लाईन दो हिस्सों में बांटती है। इसलिये पुराना रतलाम व पटरी पार का नया रतलाम के बारे में हमें अलग अलग सोचना होगा। इस बारे में किसी भी निर्णय पर पहुॅंचने के पहले हमें वर्तमान में कितनी सब्जी मंडियाॅं है व उनमें क्या समस्याएं है उन पर विचार करना होगा। वर्तमान सब्जी मंडियों के नाम व स्थान इस प्रकार हैं।
- माणकचौक सब्जीमंडी
- कसारा बाजार सब्जीमंडी
- बाजना बस स्टेंड सब्जीमंडी।
- नीमचैक सब्जीमंडी
- हरदेवलाला सब्जीमंडी
- आबकारी चौराहा सब्जीमंडी
- काटजू नगर ओवरब्रिज के नीचे
- बैंक काॅलोनी महलवाडा सब्जीमंडी
- पैलेस रोड पर
- थावरिया बाजार क्षेत्र
- घांस बाजार सब्जीमंडी
- शिक्षा विभाग कार्यालय के पास
- राम मंदिर क्षेत्र में लगने वाली सब्जीमंडी
- कस्तुरबा नगर मेन रोड सब्जीमंडी
- इंदिरा नगर तिराहे पर सब्जीमंडी
- गांधी नगर क्षेत्र सब्जीमंडी
- रेल्वे हाॅस्पीटल क्षेत्र सब्जीमंडी
- रेल्वे काॅलोनी मेन रोड जूनियर स्टेडियम
- डाट की पुल रोड पर
- जावरा फाटक के पार
- टी.आय.टी. रोड पर
- स्टेडीयम के पास सब्जीमंडी
इन सभी सब्जी मंडीयों के नाम जानने के बाद आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि व्यवस्थित प्लानिंग के साथ बनाई गई एकमात्र, ऐतिहासिक माणकचौक स्थित सब्जीमंडी ही वैध है उल्लेखनीय है कि माणकचौक सब्जीमंडी उस समय की जनसंख्या को ध्यान में रखकर बनाई गई थी बाकि की लगभग सारी सब्जीमंडियाॅं अवैध होकर सड़क पर लगा ली जाती हैं। आज की तिथि में किसी भी शासकीय विभाग का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है।
रतलाम शहर में रहने वाले 100 प्रतिशत परिवार लगभग प्रतिदिन या हर दूसरे दिन सब्जी खरीदते हैं। प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह किसी भी नौकरी या व्यवसाय से जुडा है अपने परिवार के लिये सब्जी जरूर लेता है। लेकिन यह जानकर अत्यंत आश्चर्य हुआ कि राजाओं के जमाने से चली आ रही माणकचौक सब्जीमंडी के बाद आज तक किसी अन्य फुटकर सब्जी मंडी के बनाने को लेकर कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया गया। इसलिये संपूर्ण शहर को सब्जीमंडी में बदलने से रोकने, सभी वैध-अवैध सब्जी मंडियों की व्यवस्थाओं में आमूलचूल परिवर्तन करने, सुधार करने के दृष्टिकोण से, जागरूक नागरिकों व्दारा स्थानीय प्रशासन को एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट के माध्यम से सुझाव देने का निर्णय लिया गया। जिससे सब्जीमंडी के मामले में अपने शहर को वास्तविकता में अमृत-स्मार्ट सिटी के रूप में बदलता हुआ देखा जा सके।
खाद्य विभाग के नियंत्रण की चिंता किये बिना किसी भी व्यक्ति को सब्जी बेचना है तो वो कहीं पर भी किसी भी स्थिति में बेच सकता है उन स्थितियों में उसे सब्जी खरीदने वाले ग्राहक भी मिल जाते हैं। कहीं सड़क पर, किसी नाली के पास, किसी गंदगी के ढेर के पास, भिनभिनाती मक्खियों, मच्छरों के मधुर संगीत के साथ, मनुष्यों के साथ-साथ गाय, सांड, कुत्ते भी इस सड़क पर बनी सब्जीमंडी में आपका स्वागत करते दिखाई देते हैं।
अत्यंत महत्वपूर्ण व प्रत्येक परिवार की दैनिक आवश्यकता को पूर्ण करने वाली सब्जी मंडियां कहॉं और किन सुविधाओं के साथ होना चाहिये? इस संदर्भ में नागरिकों व सब्जी विक्रेताओं की क्या अपेक्षाएं है इस बारे में जानकारी एकत्र करने का प्रयत्न किया गया। सारी जानकारी एकत्रिकरण करने वाले स्वप्रेरित कार्यकर्ता किसी व्यावसायिक सर्वे टीम की तरह कार्य शायद न कर सकें हो परंतु उदेश्य स्पष्ट व सकारात्मक था। रतलाम शहर में इस प्रकार का सर्वे करने का शायद यह पहला प्रयास था जिसमें सोशल मीडिया का भी भरपूर उपयोग किया गया। सामान्य नागरिकों ने भी इस प्रयास के लिये जोरदार समर्थन देते हुए सोशल मीडिया पर इसे हाथोहाथ लिया। जिसमें हमने दिनांक 31 जनवरी 2016 तक फोनकाॅल-व्यग्तिगत भेट-वॉट्सअप-ईमेल आदि के माध्यम से सुझाव प्राप्त किये। सभी प्राप्त सुझावों को संकलित-संपादित कर यह फायनल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई गई है। संपूर्ण शहर को इस अव्यवस्था व गंदगी से बचाने के लिये निम्न बिंदुओं पर विचार किया जाना चाहिये।
रतलाम शहर में सब्जी मंडियों की व्यवस्था में सुधार के लिये, आने वाले 50 वर्षों की प्लानिंग को ध्यान में रखते हुए नागरिकों, व्यापारियों के व्दारा बताये गये महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं।
- शहर के मध्य में वर्षों से रिक्त पडे बडे-बडे निजी/शासकीय भूखण्डों को शहर के हित में अधिग्रहित किया जाना चाहिये। इंटरनेट पर गूगल अर्थ की मदद से हमें रतलाम शहर की वर्तमान बसाहट का सूक्ष्म अध्ययन कर, शहर को सात-आठ प्रमुख झोन में बांटते हुए जनसंख्या के घनत्व को ध्यान में रखते हुए, बडे-बडे रिक्त भूखण्डों को चिन्हित करना होगा। इसके साथ ही कुछ ऐसे स्थान जैसे जिला जेल, सर्किट हाउस को शहर से बाहर बनाकर उस स्थान का ज्यादा उपयोग ध्यान में रखते हुए नया निर्माण करना होगा।
- सब्जीमंडी के निर्माण के लिये किसी क्रियेटिव आर्किटेक्ट की सलाह लेकर यहाॅं की आवश्यकताओं की बारीकियों को समझते हुए निर्माण कार्य किया जाये। हर मौसम जैसे गर्मी, ठंड, बारिश, कीचड़ गंदगी, पानी की निकासी, सुरक्षा, पार्किंग, इमरजेंसी एक्झिट आदि बातों का ध्यान रखा जाये। निर्माण के पहले क्षेत्रवासियों व सबंधित व्यापारियों को प्रोजेक्टर या थ्रीडी माॅडल के माध्यम से प्लान समझाया जाये।
- सब्जी व्यवसाय से जुडे सभी प्रकार के व्यापारियों जैसे थोक, फुटकर, गली गली घूमने वाले हाॅकर आदि को अनिवार्यतः परिचय पत्र दिया जाकर उनकी नाम,पता, मोबाईल, आर्थिक स्थिति आदि सूचनाओं को संकलित कर सूचि बनाई जाये। जिससे उन सभी को सामुहिक रूप से इस व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिये संबोधित, प्रेरित, संगठित, निंयत्रित किया जा सके।
- शहर के आसपास के कितने गाॅंवों से सब्जियाॅं यहाॅं आती हैं उस आधार पर उसी क्षेत्र को ध्यान में रखकर नई सब्जीमंडियों का निर्माण किया जाये।
- इस व्यवसाय से जुडे सभी हाॅकरों की संख्या, थोक व्यापारियों की संख्या को ध्यान में रखकर टीनशेड वाले ओटले/प्लेटफार्म का निर्माण शहर में 8-10 स्थानों पर किया जाये।
- व्यस्ततम बाजार क्षेत्र को हाॅकर मुक्त झोन बनाया जाये और सभी सब्जी मंडियों को शहर की घनी बस्ती से थोडा बाहर की और ले जाना श्रेयस्कर होगा। यह बिल्कुल भी आवश्यक नहीं की जहाॅं सोना, साडी, पुस्तकें, रंगरोगन, बर्तन आदि बिकते हों वहीं पर सब्जी भी बिके। अर्थात चांदनीचौक, नीमचौक, धानमंडी, घांस बाजार, कसारा बाजार, राममंदिर क्षेत्र जैसे स्थानों पर अवैध सब्जीबाजार नहीं होना चाहिये।
- सब्जी मंडी से निकलने वाले खाद्य कचरे को पांजरापोल में पशुओं तक पहुॅंचाने की व्यवस्था होे। इसका उपयोग प्राकृतिक, जैविक खाद आदि के निर्माण में भी किया जा सकता है।
- व्यस्त बाजार में दुकानों के सामने सरकारी फुटपाथ के उपयोग पर व्यापारियों के व्दारा सब्जीवालों से अवैध किराया वसूल करने की शिकायतें मिली हैं व्यस्त बाजार से हट जाने पर यह शोषण अपने आप ही बंद हो जायेगा।
- शहर में कितने स्थानों पर वैध सब्जीमंडीयाॅं हैं उनकी लिस्ट को सार्वजनिक किया जाये। इसके अलावा की सभी स्थानों पर बिकने वाली जगहों को अवैध सब्जी बाजार मानते हुए ऐसे विक्रेताओं पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाये।
- सब्जियों के विभिन्न प्रकार जैसे आलु-प्याज वाले, फल वाले, हरी सब्जियाॅं बेचने वाले को ध्यान में रखकर उनके बैठक की व्यवस्था की जाये। ठेले वालों की लाईन अलग होना चाहिये।
- आय बढाने के लिये मंडी में एंट्री का 1 रूपये का यूजर चार्जेस होना चाहिये जिसका उपयोग भविष्य में उसी सब्जीमंडी के विकास में किया जा सके। शासन को इससे वर्तमान में कितना रेवेन्यु मिलता है इसे सार्वजनिक किया जाये। नागरिकों में सिविक सेंस बढाने के लिये स्वच्छ सब्जी मंडी के उपयोग को प्रोत्साहन देना होगा।
- व्यवस्थित बाउंड्रीवाॅल वाली सब्जीमंडियों का निर्माण किया जाये जिससे मंडी के अंदर दोपहिया वाहन व आवारा पशुओं पर रोक लग सके। जिससे स्कूटर पर बैठे-बैठे सब्जी खरीदने के रतलामी चलन को सख्ती से रोका जा सकेगा। ग्राहकों के लिये पार्किंग आदि की व्यवस्था हो।
- ग्राहकों व विक्रेताओं को पीने के निःशुल्क स्वच्छ पानी व स्वच्छ कैंटीन आदि की व्यवस्था हो।
- महिलाओं व पुरूषों के लिये सार्वजनिक सुविधाघरों का निर्माण भी आवश्यक रूप से होना चाहिये।
- देर शाम तक सब्जीमंडी में व्यापार संभव हो इसके लिये उचित प्रकाश व्यवस्था होना चाहिये।
- सब्जीमंडीयों में जगह जगह डस्टबिन हों और हर आधे घंटे में कचरा उठाने की व्यवस्था हो जिससे गंदगी, बदबू पर रोक लग सके। ग्राहकों के पैरों के नीचे सब्जियों के अवशेष, गंदगी, कीचड न होकर उन्हें किसी शापिंग माॅल जैसा इफेक्ट दिया जा सके।
- अगर व्यवस्थित सब्जीमंडियाॅं बन जाती हैं तो इससे यातायात, गंदगी, भीड नियंत्रण आदि बहुत सारी व्यवस्थाओं पर पर सीधा असर पडेगा। ट्राफिक जाम नहीं होगा।
- यहाॅं प्रतिदिन लाखों रूपयों का कारोबार होता है सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था हो। 360 डिग्री वाले टीटीझेड केमरों की व्यवस्था हो।
- मंडी के अंदर सब्जियों को बेतरतीब तरीके से बेचने व सामानों के व्दारा अस्थायी, तात्कालिक अतिक्रमण पर सख्त कार्यवाही होती रहे। इसके लिये विदेशों में सब्जीमंडी की व्यवस्थाएं इंटरनेट पर देखी जा सकती हैं। अगर वो कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं?
- एक कृषक भवन बनाया जाकर उसमें लाॅकर जैसी व्यवस्था हो जिसमें अत्यंत छोटे दुकानदारों को तराजु , बाट व कुछ खाली टोपले आदि रखने की व्यवस्था हो जिससे उन्हें रोज रोज अपने गाॅंव से सामान उठाकर न लाना पडे।
- सब्जीमंडी में प्लास्टिक बैग पर पूर्ण व सख्त रोक लगे, एक दुकान भी अनिवार्यतः कपडे की थैलियाँ आदि उपलब्ध कराने वाली आवंटित की जाये।
- शहर के हित में विभिन्न आर्थिक संस्थानों व्दारा अत्यंत कम या नगण्य ब्याज पर इन छोटे व्यवसाईयों को ठेलागाडी लोन, छोटी पूंजी आदि सुलभ तरीके से दिया जाये।
- मोबाईल सब्जीमंडियों को बढावा देने हेतु छोटे केरियर वाहन के उपयोग को प्रोत्साहित करें। इससे दूरदराज की काॅलानियों में भी नागरिकों को सब्जी उपलब्ध हो सके।
- नई काॅलोनी बनाने वाले काॅलोनाईझरों को अनुमति देने से पूर्व वहाॅं के रहवासियों की सार्वजनिक, दैनिक आवश्यताओं पर क्या व्यवस्था होनी चाहिये इस पर भी विचार हो।
नई सब्जीमंडीयों के निर्माण के लिये जनता व्दारा विभिन्न स्थानों का सुझाव।
उपरोक्त सभी तथ्यों पर विचार करने के पश्चात नई सब्जीमंडियाॅं कहाॅं पर होना चाहिये इसके लिये विभिन्न सुझाव प्राप्त हुए हैं।
1 अमृत सागर बगीचे के सामने रिक्त भूमि पर एक बहुत बढिया आधुनिक सब्जीमंडी बनाई जा सकती है। जिससे एक बहुत बडे, घनी जनसंख्या वाले क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों की लंबे समय से होने वाली मंाग को पूर्ण किया जा सकता है एवं चांदनीचौक, कसारा बाजार, लक्कडपीठा क्षेत्र में यातायात, स्वच्छता में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त की जा सकती है।
2 सागोद रोड पर जैन स्कूल के पीछे रिक्त भूमि पर भी व्यवस्थित बडी सब्जीमंडी बनाई जा सकती है इससे इस क्षेत्र के नागरिकों को सुविधा देने के साथ साथ नीमचौक व आसपास के मेन रोड वाले क्षेत्र को गंदगी मुक्त किया जा सकेगा।
3 सैलाना बस स्टेंड स्थित मंडी में विश्व स्तरीय व्यवस्था की जा सकती है जिससे वेदव्यास काॅलोनी, काटजू नगर, पत्रकार काॅलोनी, शास्त्री नगर, न्यू रोड, लोकेंद्र टाॅकिज, शहर सराय आदि क्षेत्र के नागरिकों को सुविधा दी जा सके। सिविक सेंटर के पीछे रिक्त भूमि पर भी एक बडी सार्वजनिक सब्जीमंडी बनाई जा सकती है।
4 सैलाना बस स्टेंड से राममंदिर की और जाने वाले ओवरब्रिज के नीचे रेल्वे लाईन के दोनों तरफ भी आसपास के क्षेत्र अर्थात काटजू नगर व पटरी पार कस्तुरबा व जवाहर नगर के लिये उपयुक्त सब्जी मंडी बनाई जा सकती है।
5 राजस्व काॅलोनी व विद्युत मंडल कार्यालय के बीच का हिस्सा अर्थात गोमदडे की पुलिया वाला रिक्त भूभाग भी उपयोग में लिया जा सकता है।
6 न्यू रोड के पीछे की ओर साइंस एंड आर्ट्स काॅलेज से लगे रिक्त भूखंड पर भी इसके लिये प्लानिंग की जा सकती है।
7 आंबेडकर भवन के पास रिक्त बडे भूखंड पर भी इस संपूर्ण क्षेत्र को ध्यान में रखकर इसका उपयोग बहुत बडी आधुनिक सब्जीमंडी, पार्किंग आदि के लिये किया जा सकता है। सर्वविदित है कि सब्जीमंडी दैनिक आवश्यकता है धार्मिक व अन्य सामाजिक कार्यक्रमों को शहर से बाहर पांडालों की व्यवस्था की जा सकती है।
8 वर्तमान सर्किट हाउस को शहर से बाहर दूर बनाकर उस स्थान पर भी एक बडा मार्केट आदि बनाया जा सकता है। जिससे वी.आय.पी. मूवमेंट में भी नागरिकों को सुरक्षा के नाम पर होने वाली असुविधा से बचाया जा सकेगा।
9 टी.आय.टी. रोड पर लगने वाली सब्जी मंडी को इसी स्थान पर बने शासकीय औषधालय वाले भवन को पुर्ननिर्माण कर भूतल पर पक्की नई सब्जीमंडी व प्रथम तल पर शासकीय औषधालय आदि लगाया जा सकता है।
10 नगर निगम के वर्तमान कार्यालय को महू रोड़ पर नये बनने वाले कलेक्टोरेट भवन के आसपास किसी अन्य स्थान पर ले जाया जाकर वर्तमान नगर निगम वाले स्थान पर भी बडा व्यावसायिक मार्केट बनाया जा सकता है। जिससे महलवाडा परिसर व आसपास के बडे रहवासी क्षेत्र को स्थायी समाधान दिया जा सकता है।
11 जिला जेल भवन को भी शहर से बाहर बनाकर उस स्थान का उपयोग सार्वजनिक हित के किसी अन्य आवश्यक कार्य में किया जाना नागरिकों के हित में होगा।
12 रेल्वे लाईन के दूसरी ओर जवाहर नगर में इंडियन आॅयल के पुराने डिपो व इसके आसपास पडी रिक्त भूमि पर भी इस संपूर्ण क्षेत्र को ध्यान में रखकर बडी आधुनिक सब्जीमंडी बनाई जा सकती है। इससे राम मंदिर क्षेत्र , फोरलेन, डाट की पुल, रेल्वे काॅलोनी मेन रोड़ पर यातायात का दबाव भी कम किया जा सकेगा।
13 इसके अलावा संपूर्ण शहर के मध्य में जितने भी बडे-बडे भूखण्ड कई वर्षों से रिक्त अवस्था में पडे हैं उनको अधिग्रहित कर उपयोग में लिया जाना जन-सामान्य नागरिकों के हित में होगा।
14 चौडावास(रामगढ़), गढ़कैलाश (अमृतसागर), महलवाडा के अंदर मैदान में, त्रिवेणी ग्राउंड, बिरियाखेडी, 80 फीट रोड़, बड़बड़ के आसपास वाला क्षेत्र आदि स्थानों के बारे में भी सुझाव आये हैं।
इस संपूर्ण प्रक्रिया का उदेश्य हमारे नेतृत्व को इस बारे में गंभीर विचार के लिये प्रोत्साहित कर इसे वास्तविकता में साकार करना है।
रतलाम की जनता की ओर से जनता को समर्पित
संकलनकर्ता:- अनिल पेंडसे 525 काटजू नगर रतलाम
मो. 9425103895 Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
Thursday, July 2, 2015
गाजरघांस
गाजरघांस
अक्सर मैं सुबह घूमने जाता हूॅं। हमारे काटजू नगर कॉलोनी की बसाहट बहुत ही शानदार है। एक—दो बडे राउण्ड सवेरे—सवेरे घूमकर अच्छा लगता है। इसी दौरान बरबस ही बहुत सारी बातें ध्यान में आती हैं उन्हीं को आप के साथ शेअर करना चाहता हूॅं। मैंने देखा एक घर के मुख्य प्रवेश व्दार पर गाजर घांस भरपूर मात्रा में उगी हुई है उनके अपने निजी बगीचे,आॅंगन में भी गाजरघास देखी जा सकती है। जिस प्रवेश व्दार से उस परिवार के सभी सदस्य दिनभर आवाजाही करते हैं उनके अपने घर के बाहर गंदगी बिखरी पडी है जबकि घर को देखने से प्रतीत होता है अच्छे समृद्ध परिवार से हैं घर के सामने चारपहिया गाडी खडी है। दो—तीन दोपहिया वाहन भी हैं। लेकिन क्या इनके पास इतना भी समय नहीं कि ये अपने स्वयं के घर के प्रवेश द्वार के मध्य में लगी गाजरघांस हटा सकें? क्या इतने छोटे से कार्य के लिये भी ये नगर निगम पर निर्भर रहेंगे? चलो मान लिया कोई बडा मैदान या पडोस का संपूर्ण प्लॉट ही खाली पडा है और उसकी सफाई नहीं हो रही है वहॉं तक तो ठीक। हद हो गई है अनदेखी और आलसीपने की।
अक्सर मैं सुबह घूमने जाता हूॅं। हमारे काटजू नगर कॉलोनी की बसाहट बहुत ही शानदार है। एक—दो बडे राउण्ड सवेरे—सवेरे घूमकर अच्छा लगता है। इसी दौरान बरबस ही बहुत सारी बातें ध्यान में आती हैं उन्हीं को आप के साथ शेअर करना चाहता हूॅं। मैंने देखा एक घर के मुख्य प्रवेश व्दार पर गाजर घांस भरपूर मात्रा में उगी हुई है उनके अपने निजी बगीचे,आॅंगन में भी गाजरघास देखी जा सकती है। जिस प्रवेश व्दार से उस परिवार के सभी सदस्य दिनभर आवाजाही करते हैं उनके अपने घर के बाहर गंदगी बिखरी पडी है जबकि घर को देखने से प्रतीत होता है अच्छे समृद्ध परिवार से हैं घर के सामने चारपहिया गाडी खडी है। दो—तीन दोपहिया वाहन भी हैं। लेकिन क्या इनके पास इतना भी समय नहीं कि ये अपने स्वयं के घर के प्रवेश द्वार के मध्य में लगी गाजरघांस हटा सकें? क्या इतने छोटे से कार्य के लिये भी ये नगर निगम पर निर्भर रहेंगे? चलो मान लिया कोई बडा मैदान या पडोस का संपूर्ण प्लॉट ही खाली पडा है और उसकी सफाई नहीं हो रही है वहॉं तक तो ठीक। हद हो गई है अनदेखी और आलसीपने की।
Sunday, June 28, 2015
रतलाम :— हॉं, मैं भी सब्जीवालों के समर्थन में हूॅं।
रतलाम :— हॉं, मैं भी सब्जीवालों के समर्थन में हूॅं। आखिर बार—बार फुटबॉल की
तरह तोपखाना क्षेत्र से उठाकर काशीनाथ के नोहरे की गंदगी में स्थानांतरित
करना, वो भी बिना सुविधा के कहॉं तक उचित है? क्या
काशीनाथ के नोहरे में सब्जी बेचने लायक सुविधाएं उपलब्ध हैं? आप स्वयं
देखें चारों तरफ रहवासी क्षेत्र का गंदा सा पिछवाडा, भरपूर अतिक्रमण, आने
जाने के लिये केवल एक संकरा सा रास्ता, आखिर सब्जी कैसे बेची जा सकती है
यहॉं पर?
आप सभी वर्क एनवायरमेंट शब्द से परिचित होंगे अर्थात कार्य करने की जगह का वातावरण। चाहे वह सब्जी बेचने का कार्य हो या कलेक्टर का आॅफिस हो। साफ सुथरी, सुविधाओं से परिपूर्ण व्यवस्था हो तो विरोध का कोई कारण ही नहीं होगा।
काशीनाथ के नोहरे में होना क्या चाहिये —
केवल डंडे के दम पर इधर उधर ढकेलने से नहीं वरन विवेकपूर्ण तरीके से उचित सुविधा के साथ स्थानांतरित किया जाता है तो ग्राहकों के साथ—साथ ये छोटे—छोटे व्यवसायी स्वयं ही प्रशासन को सहयोग करेंगे।
आज की जनसंख्या के आधार पर संपूर्ण रतलाम में कितनी सब्जी मंडियॉं होना चाहिये? उनका स्थान कहॉं होना चाहिये? क्या भीड़भाड और यातायात को नियंत्रित करने में कोई अधिकारी इसका महत्व समझेगा? क्या इस प्रकार का कोई सर्वे प्रशासन की ओर से किये जाने का कोई प्रावधान है? क्या नागरिकों से उनकी अपेक्षाओं को जानने की कोई प्रशासनिक व्यवस्था है? क्या कोई अधिकारी समग्र रूप से इस संपूर्ण रतलाम की सब्जी बेचने की व्यवस्था को नियमित कराने के लिये स्वयं प्रेरणा लेकर कोई ठोस एवं स्थायी कार्य योजना बना सकता है? जिससे इन छोटे व्यवसायियों का फुटबॉल बनने से रोका जा सके।
रतलाम के सर्वांगीण विकास के लिये प्रतिबद्ध, शुभकामनाओं के साथ!!
अनिल पेंडसे, रतलाम 9425103895
आप सभी वर्क एनवायरमेंट शब्द से परिचित होंगे अर्थात कार्य करने की जगह का वातावरण। चाहे वह सब्जी बेचने का कार्य हो या कलेक्टर का आॅफिस हो। साफ सुथरी, सुविधाओं से परिपूर्ण व्यवस्था हो तो विरोध का कोई कारण ही नहीं होगा।
काशीनाथ के नोहरे में होना क्या चाहिये —
- सब्जी बेचने के लिये सड़क से 1½ फीट उॅंचे और 6'x6' फीट के, स्टेडियम की सीढ़ीनुमा छोटे—छोटे ओटले होना चाहिए जिस पर सब्जियों को सजाकर रखा जा सके और विक्रेता मध्य में बैठ सके।
- सड़क के दोनों और कतारबद्ध, सुंदरता से परिपूर्ण ओटलों का निर्माण किया जाना चाहिए।
- ओटले पर गर्मी व बरसात आदि से बचाने के लिए तिरपाल लगाने हेतु चारों कोने पर रिमुएबल पाईप आदि लगाने की व्यवस्था हो।
- दो ओटलों के बीच कम से कम पांच फीट की दूरी हो।
- धानमंडी की तरफ से भी चौडा रास्ता हो।
- ग्राहकों के वाहनों हेतु पार्किंग की समुचित व्यवस्था हो।
- पानी के लिये एक या दो हैंडपंप की व्यवस्था हो।
- हर दिन ''तीन बार नियमित सफाई'' की व्यवस्था हो।
- आवारा पशुओं व वाहनों की रोक के लिए दोनों छोर पर माणकचौक सब्जी मंडी जैसा गेट आदि हो।
- अतिक्रमण को पूरी ताकत के साथ हटाया जाये।
केवल डंडे के दम पर इधर उधर ढकेलने से नहीं वरन विवेकपूर्ण तरीके से उचित सुविधा के साथ स्थानांतरित किया जाता है तो ग्राहकों के साथ—साथ ये छोटे—छोटे व्यवसायी स्वयं ही प्रशासन को सहयोग करेंगे।
आज की जनसंख्या के आधार पर संपूर्ण रतलाम में कितनी सब्जी मंडियॉं होना चाहिये? उनका स्थान कहॉं होना चाहिये? क्या भीड़भाड और यातायात को नियंत्रित करने में कोई अधिकारी इसका महत्व समझेगा? क्या इस प्रकार का कोई सर्वे प्रशासन की ओर से किये जाने का कोई प्रावधान है? क्या नागरिकों से उनकी अपेक्षाओं को जानने की कोई प्रशासनिक व्यवस्था है? क्या कोई अधिकारी समग्र रूप से इस संपूर्ण रतलाम की सब्जी बेचने की व्यवस्था को नियमित कराने के लिये स्वयं प्रेरणा लेकर कोई ठोस एवं स्थायी कार्य योजना बना सकता है? जिससे इन छोटे व्यवसायियों का फुटबॉल बनने से रोका जा सके।
रतलाम के सर्वांगीण विकास के लिये प्रतिबद्ध, शुभकामनाओं के साथ!!
अनिल पेंडसे, रतलाम 9425103895
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