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Monday, August 6, 2018

रतलाम, रेल्वे कॉलोनी में सब्जीमंडी हेतु जगह आरक्षित करने हेतु सुझाव

प्रति,
श्रीमान डीआरएम महोदय,
पश्चिम रेल्वे, रतलाम
दिनांक 06/08/2018

विषय:— रेल्वे कॉलोनी में सब्जीमंडी हेतु जगह आरक्षित करने हेतु सुझाव।

आदरणीय श्रीमान,
रेल्वे विभाग ने अपने कर्मचारियों व उनके परिवार के सदस्यों के हितों को ध्यान में रखकर, एक अत्यंत शानदार व्यवस्था वाली रेल्वे कॉलोनी का निर्माण किया है। जिसमें चौडी सड़कें,खेल मैदान,हॉस्पिटल,विद्युत प्रदाय,जलप्रदाय,साफ—सफाई की व्यवस्था,स्कूल,जिम,सांस्कृतिक आयोजन हेतु स्थान व अन्य कई सुविधाएं पहले से ही उपलब्ध हैं।
लेकिन यहॉं रहने वाले कर्मचारियों को सब्जी खरीदने जैसी दैनिक आवश्यकता हेतु शहर के अन्य हिस्सों पर निर्भर रहना होता है। साथ ही इसके कारण डाट की पुल क्षेत्र जो कि संपूर्ण रेल्वेकॉलोनी व इससे जुडी अन्य कॉलोनियों का मुख्य प्रवेशद्वार है। ​जहां अवैध सब्जीमंडी होना भीड़भाड़ का कारण बनता है। इससे रेल्वे कॉलोनी का अंदरूनी मुख्य मार्ग भी कई बार बाधित व गंदा रहता है। इसके पहले भी कई बार अतिक्रमण हटाने के असफल प्रयास हो चुके हैं लेकिन कुछ ही दिनों के बाद फिर वही स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

इसे ध्यान में रखते हुए मेरा सुझाव है कि रेल्वे कॉलोनी में ही डाट की पुल क्षेत्र से अंदर रेल्वे कॉलोनी वाले हिस्से में पटरियों के पास या इंडियन आॅयल के पुराने डिपो के पास व्यवस्थित टीनशेड वाली दुकानों का निर्माण किया जाता है तो इससे रेल्वे को आय होने के साथ साथ डाट की पुल पर यातायात नियंत्रण में भी बहुत बडा योगदान होगा।
उल्लेखनीय है कि डीआरएम कार्यालय जो कि रतलाम की शान होकर, उसके सामने बाहर लगे ट्रांसफॉर्मर को हटाने के बाद से इस कार्यालय की सुंदरता देखने लायक हो गई है। साथ ही दोबत्ती से लगाकर डाट की पुल तक के क्षेत्र में नई चौडी सड़क का निर्माण भी प्रस्तावित है, ऐसे में कर्मचारियों के हित को देखते हुए रेल्वे कॉलोनी के अंदर किसी भी उचित स्थल पर व्य​वस्थित शेड निर्माण कर इस समस्या का स्थायी समाधान आपके कार्यकाल में किया जाना हमेशा के लिये याद रखा जायेगा।

अनिल पेंडसे 9425103895
Anil.Pendse.Rtm@gmail.com
प्र​तिलिपि — शहर विकास से संबंधित सभी प्रमुख संस्थान,अधिकारी,नेतृत्व,समाजसेवी व समाचार पत्र

Wednesday, July 25, 2018

रतलाम रेल्वे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकिट लेने पर वाहन पार्किंग नि:शुल्क हो

श्रीमान डीआरएम महोदय,
रतलाम
22/07/2018
पार्किंग शुल्क के संदर्भ में

आदरणीय श्रीमान,
रतलाम रेल्वे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकिट लेने पर निजी दोपहिया वाहन पार्किंग नि:शुल्क उपलब्ध होना चाहिये।

आज रेल्वे स्टेशन पर अपने बेटे को छोडने के लिये गया था तब दोपहिया वाहन की पार्किंग के लिये ₹10 का शुल्क भुगतान किया, फिर प्लेटफॉर्म पर जाने के पहले प्लेटफॉर्म टिकिट का शुल्क  ₹10 का भी भुगतान किया। मुझे लगता है कि जिस यात्री के पास प्लेटफार्म टिकिट है उसे पार्किंग नि:शुल्क उपलब्ध होना चाहिये जो कि उसका अधिकार है।
कृपया उचित कार्यवाही अपेक्षित
धन्यवाद

अनिल पेेंडसे 9425103895
रतलाम

Sunday, July 22, 2018

रतलाम — शवयात्रा का बाजार से निकलना।

रतलाम — शवयात्रा का बाजार से निकलना।
आज मैं एक शवयात्रा में गया था। जो कि आबकारी चौराहा होते हुए त्रिवेणी मुक्तिधाम की ओर जा रही थी। मार्ग में एक बडी शोभायात्रा चल रही थी इसलिये शववाहन को चांदनीचौक के स्थान पर बजाजखाना होते हुए चौमुखीपुल, रामगढ़ व अन्य तंग गलियों से होते हुए त्रिवेणी तक ले जाया गया।
मेरा विचार यह है कि जब भी कोई शोभायात्रा या अन्य सार्वजनिक आयोजन सड़कों पर किये जाते हैं ऐसे समय सड़क का आधा हिस्सा अनिवार्य रूप से अन्य आने जाने वाले लोगों, एंबुलेंस, शववाहन आदि के लिये छोडा जाये। यह तभी संभव है जब इस प्रकार के सार्वजनिक आयोजन समिति के सदस्य इस बात का ध्यान रखें, साथ ही मार्ग अतिक्रमण मुक्त भी हों।
इस बार यातायात सुधार से संबंधित नई मुहिम शुरू हो रही है तो इसका पहला कार्य अतिक्रमण मुक्त बाजार हो। जिससे यातायात से संबंधित 90% समस्याएं समाप्त हो जायेंगी।



Tuesday, September 26, 2017

रतलाम बनाने वालों को जलेबी ज्यादा पसंद रही होगी

रतलाम बनाने वालों को जलेबी ज्यादा पसंद रही होगी

रतलाम की सारी सड़कें जलेबी जैसी गोल गोल घुमावदार हैं। जैसे दो बत्ती से कॉन्वेंट स्कूल गोल, दो बत्ती से छत्री पुल गोल, दो बत्ती से न्यू रोड़ गोल, दो बत्ती से पॉवर हाउस रोड़ गोल, दो बत्ती से फ्रीगंज गोल, इंदिरा नगर मेन रोड़ गोल, कस्तूरबा नगर मेन रोड़ गोल, सैलाना बस स्टैंड से गायत्री सिनेमा रोड़ गोल, सैलाना बस स्टैंड से लोकेन्द्र सिनेमा गोल, लोकेन्द्र सिनेमा से जेल रोड़ गोल,डालूमोदी बाजार से घांस बाजार गोल, थावरिया बाजार ........
अगर कुछ सीधी लाइन में है तो लोहार रोड से त्रिपोलिया गेट ! (गूगल अर्थ पर देख लो )

जी हां! किसी ज़माने में किसी व्यक्ति ने उसकी सुविधा से बरसात के मौसम में कोई पगडंडी बना दी होगी, रतलाम नगर निगम ने उसी पर डामर पोत दिया।

हद तो तब हो गई जब कॉर्पोरेशन(कर—परेशान) भी यही करे। रिलायंस पेट्रोल पम्प से राजस्व कालोनी गोल...... आपको क्या लगता है क्या रतलाम के इंजीनियरों को सीधी लाइन खींचना नहीं आती?
सीवरेज का पाईप,जल वितरण का पाईप,टेलिफोन वायर,बिजली कनेक्शन का वायर, केबल टीवी का वायर, भविष्य में कुकिंग गैस लाईन इन गोल—गोल गलियों में कैसे लगाई जा सकेगी? स्कूल बसें इन गलियों से कैसे निकलेंगी? फायर ब्रिगेड क्या यहॉं तक पहुॅंच सकेगा? कोई भी कॉलोनाईज़र 25—50 प्लाट के साथ कोई कॉलोनी/परिसर काट दे, पर उसके रहवासी मूलभूत सुविधाओं को कैसे प्राप्त करेंगे? इसको लेकर उसकी कोई जबावदारी नहीं बनती। जैसा रायता फैलाना है फैला सकते हैं।
आज सभी का फोकस छत्रीपुल पर है... कल सागोद रोड़ की पुलिया या डाट की पुलिया पर होगा क्या फर्क पड़ जायेगा।
😡
कोई दूरदृष्टि नहीं। भविष्य के रतलाम की बनावट को लेकर कोई स्पष्ट सोच नहीं। जब कोई बडी दुर्घटना हो जायेगी तब की तब देखेंगे वाली नीतियॉं ही इस प्रकार के जनाक्रोश का कारण बनती रहेगी।

चं​डीगढ़ से भी पहले, ज्यादा दूर नहीं इंदौर को देख लो और जान लो विकास क्या होता है।

अनिल पेंडसे 9425103895

Friday, September 15, 2017

दो वर्ष की इभ्या की सहमति कौन और कैसे लेगा?


नीमच के अनामिका व सुमित राठौर दीक्षा ले रहे हैं। क्या इभ्या के वयस्क होने के पहले उसको उसके माता पिता के प्रेम से वंचित कर दी जाने वाली दीक्षा संभव है? क्या अपने मातृत्व,पितृत्व रूपी कर्तव्यों को इस प्रकार से अधर में छोड कर दीक्षा लेना उचित है? क्या दीक्षा दिलाने वाले आचार्य ने व सहमति देने वाले परिवार के सदस्यों ने इभ्या की ओर से इस प्रकार की दीक्षा पर भी कभी विचार किया है? क्या सर्व सामान्य जनमानस के मन में उभरते हजारों प्रश्नों पर कोई उत्तर है?
इसके पहले भी कक्षा 12वीं के एक टॉपर बच्चे ने दीक्षा लेने के समाचार पढने को मिले थे। जबकि उसके परिवार के सदस्य पूर्ण सहमत नहीं थे यह भी समाचार पत्रों से ही जानकारी प्राप्त हुई थी।

ऐसे समाचारों को पढ़कर ऐसा लगता है कि *ऐसे युवा जिनको अभी समाज के विकास में अपनी भागीदारी निभानी बाकि है* विशेष कर *इस आयु में* क्या इस प्रकार के निर्णय उचित प्रतीत होते हैं। क्या शिक्षित बच्चों को राष्ट्र की मुख्यधारा में रहते हुए, अपने कर्तव्यों के पालन के स्थान पर ऐसा निर्णय उचित है? ऐसे निर्णयों का विवेचन धार्मिक बनकर नहीं वरन सामान्य मानव होकर करना होगा।